महराजगंज। गुजरे वक्त में चिटफंड कंपनियों का ऐसा मकड़ जाल था की करोड़ों रुपये जमा हो गए। अब रकम पाने के लिए लोग मारे-मारे फिर रहे हैं। अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का जाल फैल गया। गांव में लोगों की गरीबी का फायदा उठाकर कंपनियां आसानी से लोन दे देती हैं। उसके बाद वसूली के लिए एजेंट बेइज्जत करते हैं। जिले में 882 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें ज्यादातर गांव में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का नेटवर्क फैला है। सूत्रों की मानें तो इन कंपनियों के कर्मी पहले क्षेत्र के बारे में अध्ययन करते हैं। इसके बाद लोगों की जरूरतों के अनुसार कर्ज मुहैया करा देते हैं। आसानी से कर्ज मिलने पर जरूरतमंद अपना काम चलाते हैं। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कंपनी के कर्मी ज्यादती करते हैं। इसे लेकर अक्सर हो हल्ला होता रहता है। शायद ही कोई ऐसा गांव होगा, जहां इन कंपनियों के कर्जदार न हो। निचलौल क्षेत्र के बढ़ैपुरवा निवासी शकीबुन ने बताया की आवश्यक कार्य के लिए रकम की जरूरत पड़ने पर लोन लेना पड़ा। कई दिनों तक बैंक का चक्कर काटने के बाद मजबूर होकर गांव की ही रहने वाली एक महिला की मदद से माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 20 हजार रुपये का लोन लिया। हर महीने 1500 रुपये का किस्त जमा करती हूं। गुजरे वक्त में इसी तरह से चिट्स फंड कंपनियाें का जाल जिले में फैला था। संवाद