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Maharajganj News: परतावल क्षेत्र में एईएस के 11 मरीज मिलने से मचा हड़कंप

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स्वास्थ्य विभाग ने खंड विकास अधिकारी को लिखा पत्र, गांवों में साफ-सफाई के साथ फागिंग कराने का निर्देश
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ब्लॉक के 11 गांवों में मिले एईएस के मामले

संवाद न्यूज एजेंसी

परतावल। ब्लाॅक के 11 गांवों में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम ने पांव पसार दिए हैं। यहां एईएस के 11 मरीज मिले हैं। इस जानकारी के बाद ब्लॉक में हड़कंप मच गया है। एईएस के मरीजों की रिपोर्ट मिलते ही सीएचसी अधीक्षक ने खंड विकास अधिकारी से गांवों में एंटीलार्वा दवा का छिड़काव कराने के लिए पत्र लिखा है। प्रभारी बीडीओ ने एडीओ पंचायत को सभी प्रभावित ग्राम पंचायतों में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

जानकारी के अनुसार, राज उर्फ अंगद 13 निवासी चौपरिया, अंशिका 5 निवासी बभनौली बुजुर्ग, आशीष 5 निवासी नगर पंचायत परतावल वार्ड नंबर 1 आंबेडकर नगर बभनौली, काव्या 3 निवासी धनमंता टोला नगर पंचायत परतावल, कार्तिक 3 निवासी ग्राम सभा बड़हरा बरईपार, आर्या कन्नौजिया 5 धनगडा, नित्या 8 परतावल, सागर 7 महमदा टोला पिपरहवा, अश्विनी 7 पिपरा खादर, शिवानंद 11 पुरैना, शीतल 13 निवासी पिपराजद्दू एईएस से पीड़ित हैं। परतवाल सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने बताया कि मरीजों का जरूरी उपचार किया गया है।
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झोलाछाप के इलाज से जिंदगी और मौत से जूझ रही शीतल
परतावल। परतावल ब्लाॅक के ग्राम पंचायत जद्दू पिपरा निवासी महेश की 13 वर्षीय पुत्री शीतल को तेज बुखार हुआ। बीते पांच अक्तूबर को वह अपनी बेटी को लेकर परतावल कप्तानगंज रोड पर स्थित झोलाछाप के यहां इलाज कराने पहुंचे। झोलाछाप ने महेश को सच्चाई नहीं बताई और रकम ऐंठने के लिए उसका इलाज शुरू कर दिया। उसकी लैब जांच भी करवाई। जांच रिपोर्ट देखने के बाद भी इलाज शुरू कर दिया।
जब मामला उसके हाथ से नहीं संभल पाया तो वह उसे सरकारी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी, लेकिन जब तक वह सीएचसी परतावल पहुंचती तब तक उसकी हालत नाजुक बन गई थी। सीएचसी परतावल के डाक्टरों ने तत्काल उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां उसे तत्काल भर्ती कर इलाज किया गया। पांचवें दिन हालत में सुधार होने पर उसे घर भेज दिया गया है।



गांव में गंदगी का अंबार, सफाईकर्मी नदारद
परतावल। क्षेत्र के जद्दू पिपरा गांव में सफाईकर्मी की मनमानी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। गांव में बनी नालियां गंदगी से पटी हुई हैं, जिससे नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। गंदा पानी से संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बनी है, लेकिन जिम्मेदार बेखबर हैं। गांव के लोगों को सार्वजनिक नाली की सफाई खुद साफ करनी पड़ती है।
एईएस संक्रमित शीतल के पिता महेश ने बताया कि गांव में तैनात सफाईकर्मी कभी आते ही नहीं हैं। कई बार इस संबंध में ग्राम प्रधान से लेकर सहायक विकास अधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन सफाईकर्मी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। ग्राम प्रधान जमिरूल्लाह ने बताया कि गांव में साफ-सफाई कराते हुए चूना ब्लीचिंग का छिड़काव कराया गया है।
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प्रभारी खंड विकास अधिकारी श्यामसुंदर तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं था। पता करता हूं। अगर सफाईकर्मी गांव में नहीं आता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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