फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: शहर से सरहद तक झोलाछाप का मकड़जाल

Sun, 20 Aug 2023 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
शहर से सरहद तक झोलाछाप का मकड़जाल
विज्ञापन
फोटो
विज्ञापन

नेटवर्क का इस्तेमाल कर मरीजों को पहुंचाते हैं निजी अस्पताल, मोटी रकम ऐंठकर चमका रहे धंधा
महराजगंज से लेकर गोरखपुर निजी अस्पतालों में भेजते हैं मरीज, बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीजों को मौत के मुंहाने पर पहुंचा रहे झोलाछाप
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर से लेकर सरहद तक झोलाछाप का मकड़जाल फैला हुआ है। ये झोलाझाप न सिर्फ शर्तिया इलाज का दावा कर रहे हैं बल्कि बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीजों को मौत के मुंहाने पर पहुंचा रहे हैं। नेटवर्क के जरिए महराजगंज से लेकर गोरखपुर तक बड़े निजी अस्पतालों में मरीज भेजकर अपना धंधा चमका रहे हैं। झोलाछाप के नेटवर्क के बीच मरीज पिस रहे हैं। पहले तो झोलाछाप खुद इलाज कर रकम ऐंठते हैं, बाद में निजी अस्पताल में पहुंचाकर कमीशन लेते हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिले में झोलाछाप के धंधे तो समझने के लिए महराजगंज शहर के जलकल रोड, जय प्रकाश नगर की ओर रुख करना पड़ेगा। झोलाछाप की क्लिनिक पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। जैसे ही कोई मरीज पहुंचता है तो उसे कम से कम छह से सात प्रकार की दवाएं देते हैं। उनको लगता है कि मरीज की हालत थोड़ी खराब है तो बोतल चढ़ाने लगते हैं। बाद में साठगांठ वाले निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। इसी तरह से नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में झोलाछाप की भरमार है। डिग्रीधारी डॉक्टर से ज्यादा इनके यहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
विज्ञापन

इन झोलाछापों ने सिर्फ दो-तीन साल किसी बड़े डॉक्टर के कंपाउंडर या वार्ड ब्वॉय की नौकरी की और खुद की क्लिनिक शुरू कर दी। बिना डिग्री-डिप्लोमा के कई झोलाछाप शॉर्ट सर्जरी भी कर देते हैं। सूत्र बताते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में कई ऐसे झोलाछाप क्लिनिक चला रहे हैं जो अपनी छोटी सी दुकान में ही ऑपरेशन थिएटर बनाकर मरीजों की सर्जरी कर जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे ही अनेक डॉक्टर जो अपनी दुकान के आगे बोर्ड लगाकर बबासीर, भगंदर जैसी बीमारी का ऑपरेशन कर बीमारी से निजात दिलाने का दावा कर रहे हैं। वहीं झोलाछाप की लूट का हिस्सा मेडिकल संचालक भी बने हुए हैं।
-
जांच कराने के नाम वसूलते रकम
-झोलाछाप की लिखी जा रहीं दवाइयों को मोटी कीमत पर बेचकर मेडिकल स्टोर संचालक आपस में मुनाफा बांट रहे हैं। इसी तरह पैथोलॉजी संचालक भी इनके माध्यम से लंबा मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं झोलाछाप की लूटखसोट का अंदाजा इसी से लगाया जाता है। सामान्य बुखार हो या पेटदर्द यह डॉक्टर्स निजी लैब संचालकों से सांठगांठ कर 200 से 300 रुपए की जांच कराते हैं।


मरीज ठीक नहीं हुआ तो चढ़ाने लगते ड्रिप
मरीज एक दिन में सही हुआ तो ठीक अन्यथा उसे 300 से 400 रुपए देकर ड्रिप चढ़ा दी जाती है। जबकि बाजार में एक ड्रिप की कीमत मात्र 40 से 70 रुपये है। मरीज झोलाछाप के यहां सिर्फ इसलिए जाता है ताकि उसे डिग्रीधारी डॉक्टर्स की फीस का लोड न सहना पड़े। लेकिन यह झोलाछाप फीस न लेते हुए दवाई व जांचों के नाम पर ही मरीजों की जेब ढीली कर रहे हैं।
-
निजी अस्पतालों में मरीज भेजकर कमाते रकम

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप के वहां से पूरा खेल खेला जा रहा है। मरीजों को अच्छे इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में पहुंचा दे रहे हैं। एक मरीज के बदले 10 से 20 हजार रुपये लेते हैं। अगर सर्जरी की बात आती है तो यह रकम 20 से 25 हजार के आसपास हो जाती है। सबसे अधिक शिकार नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्र के मरीजों को बनाते हैं।
-
इन क्षेत्रों में झोलाछाप की भरमार
मिठौरा सहित सिन्दुरियां, बरोहिया, सेखुई, परसौनी, चौक, देउरवां, सोनवल, रजवल आदि जगहों पर झोलाछाप देखे जा सकते हैं। झोलाछापों का यह धंधा गांव-गांव, चौराहे-चौराहे खूब फल-फूल रहा है। समरधीरा, पुरंदरपुर, भैयाफरेंदा, महदेवा, लेहड़ा, फुलमनहा, खजुरिया, कोमल चौराहा, रानीपुर, मनिकौरा, विश्रामपुर चौराहा सहित अन्य जगहों पर इनकी भरमार है। यह झोलाछाप पथरी, बच्चेदानी, हाइड्रोसील रोगों से परेशान मरीजों का आपरेशन करने में जरा भी समय नहीं लगाते हैं। भारत नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में भी झोलाछाप की भरमार है।
-
झोलाछाप से कराया पत्नी का इलाज, बाद में हो गई थी मौत
खोन्हौली गांव के नाथू ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले की बात है। पत्नी सुनीता (35) को हल्का बुखार और शरीर में दर्द हो रहा था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते गांव से थोड़ी दूर घोड़हवा चौराहे पर एक झोलाछाप से इलाज कराया। पत्नी की तबीयत सुधरने के बजाय बिगड़ती जा रही थी। करीब 20 दिनों तक इलाज करने के बाद हालत गंभीर देख झोलाछाप दूसरी जगह इलाज कराने की सलाह देने लगा। पैसे के अभाव में पत्नी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से रेफर होने के बाद मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। जहां पर चार दिनों तक चल रहे इलाज के दौरान पत्नी की मौत हो गई थी।
-
बेटे की हालत हो गई खराब तो पहुंचा सरकारी अस्पताल
निचलौल क्षेत्र के भारत नेपाल बॉर्डर से सटे गांव गेडहवा के टोला बलुआ के रहने वाले रमेश मुसहर ने कहा कि करीब छह माह पहले बच्चे लकड़ू (15) के पेट में दर्द उठा। उसे गांव के नहर पुल स्थित झोलाछाप को दिखाया तो उसने पूरी जिम्मेदारी लेकर इलाज शुरू कर दिया। झोलाछाप दर्द की दवा देकर बच्चे को कुछ देर तक आराम दिलाता रहा। ऐसा करीब एक महीने तक करता रहा। बीमारी बढ़ती देख झोलाछाप ने सरकारी अस्पताल में इलाज करने की सलाह दी। सरकारी अस्पताल में बच्चे को दिखाने के बाद कुछ दिनों में ठीक हो गया।
विज्ञापन

-
समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अगर ऐसी बात है तो संबंधित क्षेत्रों में छापा मारकर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से क्लिनिक या अस्पताल का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। -डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें