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Maharajganj News: बाद में सुखद होगी रफ्तार, अभी धूल का गुबार बना रहा बीमार

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बाद में सुखद होगी रफ्तार, अभी धूल का गुबार बना रहा बीमार
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शहर का एक्यूआई वर्तमान में 161 तक पहुंच गया, लापरवाही होने पर सुबह टहलने वाले सांस के रोगियों की बढ़ी समस्या
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर में सड़क बन रही है। हाईवे से कट कर रिसॉर्ट तक जाने वाली सड़क जल्दी ही बेहतर हो जाएगी। काम अंतिम चरण में है, लेकिन धूल और धुएं से सुबह टहलने वाले लोगों को मुश्किल हो रही है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) वर्तमान में 161 तक पहुंच गया है। इसे स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। पराली जलाने और निर्माण कार्य से उठ रहा धूल का गुबार लोगों को बीमार बना रहा है। अत्यधिक धूल-धक्कड़ के चलते लोग खांसी और एलर्जी के मरीज बन रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में इस तरह के मरीज 20 फीसदी बढ़ गए हैं।
बृहस्पतिवार को शहर में फरेंदा हाइवे से कटकर भाजपा कार्यालय होकर रिसाॅर्ट तक जाने वाले निर्माणाधीन सड़क पर लोगों को धूल व धुएं से परेशान होना पड़ा। काम तेजी से कराया जा रहा है। महज एक सप्ताह या 10 दिन के अंदर यह सड़क दुरूस्त हो जाएगी। वाहन फर्राटा भरते हुए रिसॉर्ट तक जाएंगे। सुबह के समय पोखरे तक टहने के लिए जाने वाले लोगों को सुखद एहसास हो गया।
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इस सड़क पर व्यवसायी आत्माराम गुप्त का मकान है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सड़क टूटी होने के कारण कोई वाहन घर के सामने से गुजरता है तो धूल से कभी-कभी सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सड़क बन जाएगी तो यह समस्या दूर हो जाएगी। इस सड़क पर आगे बढ़ने पर महेंद्र प्रसाद मिले, उन्होंने बताया कि यह सड़क कई बार बन चुकी है। इस बार लग रहा है कि ठीक बन रही है। गुजरे वक्त में सड़क जगह-जगह टूटी थी।
सड़क पर सुबह टहलने पर धूल से परेशानी होती है। आंख में दर्द की समस्या होने लगी तो इधर सुबह टहलना बंद कर दिया हूं। इसी तरह से अन्य लोगों ने भी समस्याओं को बताते हुए कहा कि अभी को समस्या हो रही है, लेकिन आने वाले दिनों में इस सड़क से गुजरने पर सुखद एहसास होगा। शहर में अन्य हिस्सों खराब सड़कों से गुजरने पर यही हाल होता है।

उपचार से अधिक सावधानी रखने की जरूरत
-शहर में श्याम मंदिर के सामने चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. एएम भाष्कर ने बताया कि लगातार धूल व वाहनों के प्रदूषण के चलते संक्रमण बढ़ रहा है। लोगों को उपचार से अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। धूल से बचने का उपाय करना होगा। ओपीडी में हर दिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनके घरों के आसपास निर्माण कार्य चल रहा है। इन लोगों को धूल व धुएं की वजह से दिक्कत हो रही है।

प्रदूषण हृदय रोगियों के लिए सबसे अधिक घातक
केएमसी डिजिटल अस्पताल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. एसएम रफीक ने बताया कि प्रदूषण हृदय रोगियों के लिए सबसे अधिक घातक है। प्रदूषण के चलते एलर्जी, सर्दी-खांसी के मामले बढ़ते हैं। मरीज के फेफड़े में भी संक्रमण होता है। इन सबका प्रत्यक्ष असर हृदय की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। हृदय रोगियों के लिए प्रदूषण प्रत्यक्ष तौर पर खतरनाक होता है। पहले से बीमार मरीजों पर इसका असर और अधिक होता है। इसलिए हृदय रोगियों को सलाह दी जा रही है कि वे खुद को प्रदूषण से बचाने का उपाय करें। इसके अलावा सुबह-शाम अगर टहलने जा रहे हैं तो हाथ-मुंह को अच्छी प्रकार से ढक लें, जिससे कि सीधे प्रदूषण की चपेट में आने से बच सकें।
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बच्चों को बड़ों की अपेक्षा अधिक सुरक्षा की जरूरत
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी बताते हैं कि कई ऐसे बीमार बच्चे आए हैं, जिनके घरवालों को एलर्जी की वजह से खांसी-सर्दी है और उनके संक्रमण से बच्चा भी बीमार हो गया। बच्चों को बड़ों की अपेक्षा अधिक सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिए मरीजों के परिजनों को सुझाव दिया जाता है कि खुद को बीमार होने से बचाएं। इधर दिवाली के बाद ओपीडी में करीब 20 फीसदी मरीज बढ़े हैं। बच्चों में सर्दी-खांसी के मामले गंभीर हैं।

ये करें उपाय

अगर धूल भरे रास्ते से वापस लौटे हैं तो हाथ-मुंह को अच्छी तरह धो लें और गुनगुने पानी से गरारा करें।

अस्थमा के मरीज धूल की तरफ जाने से बचें और अपनी दवा व इन्हेलर का नियमित उपयोग करते रहें।
अगर टहलने जा रहे हैं तो सड़क की बजाय ऐसे पार्क या मैदान में जाएं, जिसकी बाउंड्री के किनारे ऊंचे व घने पेड़ हों।
पेड़ों की पत्तियां धूल व अन्य प्रदूषण को सोख लेती हैं, जिससे पार्क के अंदर की हवा सड़क की अपेक्षा काफी शुद्ध हो जाती है।

घर से बाहर निकलें तो एन-95 मास्क पहनें। इसमें धूल व धुएं के प्रदूषण को रोकने की क्षमता अच्छी होती है।

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