शहर से गुजर रही नहर पर सौ मीटर के दायरे में तीन-तीन पुल बनवा दिए गए हैं, जबकि नियम है कि दो पुलों के बीच कम से कम सौ मीटर की दूरी होना चाहिए। यहां सौ छोड़िए 30 मीटर में ही दो-दो पुल बन गए हैं। चिऊरहां से लेकर पिपदेउरा तक ये तीनों पुल बीते एक साल में ही बने हैं वह भी विधायक निधि के 45 लाख से। अब विभाग कह रहा है कि इसकी जांच की जाएगी लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पुल बिना विभागीय अधिकारियों की जानकारी के ही बन गए। अगर हां.. तो कैसे ? अगर नहीं.. तो विभाग ने इन पुलों की जरूरत पर सवाल क्यों नहीं उठाए।
चिउरहां गोदाम से होकर नहर से आने पर महज 100 मीटर की दूरी में तीन पुल बने हैं। इफको किसान सेवा केंद्र से पहले दो पुल तो बेहद करीब हैं, इन्हें देखकर इनकी उपयोगिता पर ही लोग सवाल खड़े करते हैं। लोगों का कहना है कि व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए ये पुल बनवाए गए। शहर में भाजपा कार्यालय की ओर से जाने वाली सड़क के किनारे नहर है। इस नहर पर लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार रास्ता बना रखा है। एक पुल के तो बीचो बीच एक पेड़ लगा है, जिस कारण उस पर बड़ी गाड़ियों का आना-जाना भी मुश्किल है। पुल बनाते समय इसका ध्यान क्यों नहीं दिया गया यह भी समझ से परे है।
नहर पर मनमाने ढंग से कराया पक्का निर्माण
शहर में पिपरदेउरा जाने वाली नहर पर एक स्थान पर पक्का निर्माण करा दिया गया है, यहां नहर का स्वरूप नाले की तरह से दिख रहा है। आसपास के लोगों ने बताया कि घर में जाने को परेशानी हुई तो नहर पर दोनों तरफ से पक्का दीवार चलाकर ऊपर से छत डाल कर रास्ता दिया गया। नगर पर जगह-जगह पुल बनने के कारण सफाई में भी परेशानी होती है, लेकिन विभाग के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते हैं। यही वजह है कि नहर में पानी आने के दौरान हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है।
तीनों पुल पर खर्च हुए 45 लाख
बताया जा रहा है कि प्रत्येक पुल के निर्णाण पर 15 लाख रुपये खर्च किए गए। यानी कुल करीब 45 लाख। लोगों का कहना है कि अगर नियम का पालन विभाग ने किया होता तो इन पैसों का ऐसा दुरुपयोग नहीं होता और विधायक निधि की यह रकम कहीं और जरूरी काम में इस्तेमाल हो पाती।
लोगों ने कहानियम का पालन कराने पर सिंचाई विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। यह कौन मानक है कि 100 मीटर के अंदर ही तीन पुल बन गए हैं। एक पुल की तो उपयोगिता ही समझ में नहीं आ रही है। शिकायत के बाद भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।
-पशुपति नाथ गुप्ता, व्यापारी नेता
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अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पुल बनाने के लिए नियम को दरकिनार कर दिया गया। अगर अधिकारियों से नियम की बात की जाती है तो उनकी ओर से अनसुना कर दिया जाता है।
अभिषेक राय, शास्त्री नगर
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नियम के अनुसार काम नहीं होने पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यहां तो जिसे कार्रवाई करनी है, उसे कोई फिक्र ही नहीं है। जहां चाहा वहीं पुल बनाकर रकम खपा दिया गया।
अंबिका त्रिपाठी, अधिवक्ता, नेहरू नगर
पुल बने यह ठीक है, लेकिन किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने की नीयत से बनाया जाना ठीक नहीं है। जिम्मेदारों ने नियम कानून की धज्जियां उड़ाने में जरा भी परहेज नहीं किया।
चंद्रशेखर जायसवाल, शिक्षक, आजाद नगर
जिम्मेदार बोले
आबादी के बाहर एक किमी के दायरे में पुल बनना चाहिए। आबादी क्षेत्र में जरूरत के अनुसार कम से कम 100 मीटर के दायरे में पुल होना चाहिए। अगर कहीं बगैर अनुमति के पुल बना है तो इसकी जांच की जाएगी। नियम के अनुसार नहर पर पुल बनाने की अनुमति दी जाती है।
-प्रदीप मिश्रा, उप राजस्व अधिकारी/न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिंचाई खंड प्रथम