महराजगंज। बच्चों को मोबाइल देकर खामोश रहने वाले अभिभावक सचेत हो जाए। बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 8 से 14 साल तक के बच्चों में चिड़चिड़ापन की समस्या मिली है। वहीं याद्दाश्त भी कमजोर हो रही है। इसका वजह मोबाइल का अधिक उपयोग माना जा रहा है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि ओपीडी में 32 फीसदी मरीजों में स्क्रीन टाइम के चलते परेशानी मिली। लंबे समय तक आड़े-तिरछे बैठने, लेटकर देखने से सिर व गर्दन में दर्द, जकड़न, रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत मिली। बच्चों-किशोरों में स्मरण शक्ति, सीखने और एकाग्रता भी कम पाई गई। दरअसल, स्क्रीन से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन निकलते हैं, जो सीधे मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स संतुलन को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति पर मस्तिष्क में ट्यूमर का भी खतरा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएन वर्मा ने बताया कि बच्चे औसतन 3 घंटे स्क्रीन देख रहे हैं। इससे उनका पलक झपकाना प्रभावित हो रहा है। औसतन एक मिनट में 12-15 बार पलक झपकते हैं, बच्चे बमुश्किल 3-5 बार ही ऐसा कर रहे हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.पंकज कुमार ने बताया कि स्क्रीन एडिक्शन से बच्चों की पढ़ाई-कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ मानसिक विकार भी बढ़ गए हैं। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन, अकेले रहना की प्रवृत्ति बढ़ गई है। पढ़ाई और कामकाज भी प्रभावित होने लगा है।
ये भी मिल रहे विकार
सामाजिक ज्ञान की कमी, नकल करने की आदत ।
अश्लील सामग्री देखना, स्लीप डिसआर्डर।
मोटापा, उम्र बढ़ने पर हृदय रोग, मधुमेह।
ईयरफोन लगाने से कान में दर्द, ऊंचा सुनना।
ये करें
बच्चों को मल्टीमीडिया फोन देने से बचें।
इंटरनेट का रिचार्ज कम दिनों के लिए कराएं।
जरूरत पर ही मोबाइल- लैपटॉप का इस्तेमाल करें।
हर 20 मिनट में 20 मीटर दूर 20 सेकंड के लिए देखें।
कंप्यूटर, लैपटॉप आंखों से कम से कम 25 सेंटीमीटर दूर हो।
रात को सोने से पहले और अंधेरा करके नहीं देखें।