महराजगंज। जिला अस्पताल के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में बहरेपन की समस्या से पीड़ित अधिक मरीज आ रहे हैं। उनमें तनाव के साथ गुस्सा होने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। डॉक्टर के अनुसार 6 माह पहले करीब तीन से चार मरीज ऐसे आते थे, लेकिन अब 10 से 15 मरीज प्रत्येक दिन आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिरूद्ध कुमार ने बताया कि ईयर फोन के ज्यादा इस्तेमाल से अब युवा बहरेपन (ऊंचा सुनना) का शिकार हो रहे हैं। उनकी ऑडीटरी नस (सुनने की नस) व कोक्लियर (आंतरिक कान) में खराबी आ रही है। तनाव व गुस्से के साथ डिमेंशिया (याददाश्त खोने) भी घेरने लगा है। अब 18 से 26 वर्ष तक के युवा बहरेपन की शिकायत लेकर आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि युवाओं में बहरेपन की वजह सिर्फ ईयर फोन है। ईयर फोन से 100 डेसीबल से ज्यादा आवाज सीधे ऑडीटरी नस (सुनने की नस) को सीधे प्रभावित करती है। ईयर फोन से कोक्लियर (आंतरिक कान) की भी कोशिका खराब होती है। इनसे बहरापन शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि युवा को बहरेपन के लक्षण आने का पता नहीं चलता है क्योंकि वह वाल्यूम बढ़ाकर फिर से सुनने लगता है। यह क्रम लगातार चलता रहता है और तब पता चलता है जब बहरापन काफी बढ़ जाता है। ईयर फोन की आवाज सीधे दिमाग पर भी प्रभाव डालती है, जिससे युवाओं में तनाव व गुस्सा और याददाश्त खोने की भी शिकायतें आ रही हैं। ईयर फोन लगाने से युवाओं के कानों में फंगल इंफेक्शन भी हो रहा है।
ज्यादा ईयर फोन लगाने पर दिक्कत होनी तय
ईयरफोन लगाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खास बात यह कि 50 डेसीबल से ज्यादा आवाज नहीं होनी चाहिए, वह भी 24 घंटे में एक घंटे के लिए। इससे ज्यादा ईयर फोन लगाने पर दिक्कत होनी तय है।