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Maharajganj News: अवैध अस्पतालों का फैला जाल... फंसे तो जाएगी जान

Fri, 02 Aug 2024 04:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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अस्पताल को सील करने के दौरान खाली पड़ा बेड। 
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महराजगंज। अस्पताल में भर्ती होने से पहले डॉक्टर के बारे में जानकारी कर लें। जांच-परख के बाद ही भर्ती हों, नहीं तो जान जा सकती है। बगैर डिग्री वाले डॉक्टर मौत के मुहाने तक आपको पहुंचा देंगे।
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जानकारी के अनुसार, चार दिन पहले परतावल क्षेत्र में एक अवैध अस्पताल को सील किया गया था। इसके संचालक को अपराधों में लिप्त बताया गया। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ की इसी क्षेत्र में एक अवैध अस्पताल में भर्ती प्रसूता की मौत हो गई। इसको लेकर परिजनों ने हंगामा किया तो अस्पताल सील कर दिया गया। कार्रवाई आगे बढ़ी तो बृजमनगंज क्षेत्र में भी अवैध अस्पताल मिल गया। क्षेत्र में दो अवैध अस्पतालों को सील करने के साथ बिना पंजीकरण के संचालित एक क्लीनिक को नोटिस जारी किया गया है।
चार दिन में चार अस्पताल सील हो चुके हैं। वहीं एक क्लीनिक संचालक को भी नोटिस जारी किया गया है। हैरानी की बात है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद भी अवैध अस्पताल संचालक धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं। परतावल क्षेत्र में अवैध अस्पताल में मरीजों व गर्भवती महिलाओं को पहुंचाने के आरोप में बुद्धिरामपुर की आशा को कार्यमुक्त कर दिया गया है।
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सूत्रों की मानें तो अवैध अस्पताल संचालक आशा कार्यकर्ताओं को रकम का लालच देकर मरीजों को अस्पताल भेजने के लिए कहते हैं। सामान्य से लेकर गंभीर इलाज तक के मरीजों को भेजने के एवज में कमीशन अलग-अलग मिलता है। दो हजार से लेकर 10 रुपये कमीशन मरीज लाने के एवज में दिए जाते हैं।
मरीज और तीमारदारों को समझ में नहीं आता है। जब तक उनको जानकारी होती है, तब तक धंधेबाज अपना काम कर किनारा कस लेते हैं। अवैध अस्पतालों में भर्ती होने के बाद पहले केस को खराब कर दिया जाता है। बाद में ठीक करने के लिए रकम की मांग की जाती है। इसी के चक्कर में अक्सर मरीजों की जान चली जाती है।

सूत्रों ने बताया कि तमाम ऐसे अस्पताल हैं जो पंजीकरण के समय किसी डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल करते हैं। कुछ दिन वह डॉक्टर एक या दो घंटे के लिए ओपीडी में बैठ जाते हैं। बाद में वह अस्पताल डॉक्टर के बजाय झोलाछाप संचालित करने लगते हैं। किसी बड़े अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोग ही ऐसे अस्पतालों में डॉक्टर बन जाते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज से लेकर ऑपरेशन तक करने लगते हैं।

दो साल पहले बगैर सर्जन हो रहा था ऑपरेशन

निचलौल शहर में सिसवा मार्ग स्थित एक मकान में अवैध तरीके से संचालित हॉस्पिटल को दो वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर सील किया था। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के मुताबिक सील हॉस्पिटल पर बगैर सर्जन के ऑपरेशन किया जा रहा था, जिसकी शिकायत मिलने पर छापामार कार्रवाई की गई थी। हॉस्पिटल पर मरीजों की बेहतर इलाज को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है।


सूचना मिलने पर छापा डालकर कार्रवाई की जा रही है। इस बीच चार अवैध अस्पताल सील करने के साथ ही एक क्लीनिक को नोटिस दिया गया है। जिले में कहीं भी अवैध रूप से अस्पताल संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
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-डॉ. राजेश द्विवेदी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी
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