राशन कार्ड बनवाने में आवेदकों की घीस रहीं एड़ियां
कार्ड नहीं तो राशन नहीं : मजदूरी की रकम से राशन खरीदना मजबूरी
महराजगंज। आवेदकों को राशन कार्ड बनवाने में दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। गांव, ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर लगाते हुए आवेदकों की एड़ियां घीस जा रही हैं। लेकिन, उनकी समस्या दूर नहीं हो पा रही है। कुछ आवेदक तो ऐसे हैं, जो अज्ञानता के कारण उचित स्थान पर आवेदन नहीं जमा किए हैं। लेकिन, कुछ तो संबंधित अधिकारी को आवेदन देकर चक्कर लगाने को विवश हैं। हालत यह है कि आवेदकों को मजदूरी की रकम से राशन बाजार से खरीदना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में 1,049 राशन की दुकानें हैं। प्रत्येक माह 5 लाख 1,000 राशन कार्ड धारकों द्वारा राशन का उठान किया जाता है। जिसमें से 66,000 अंत्योदय कार्ड धारक हैं। चार लाख 35 हजार पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड धारक हैं। सिंदुरिया गांव की रहने वाली शाहजहां खातून ने बताया कि विगत छह माह से राशन कार्ड बनवाने के लिए दौड़ रही हूं, लेकिन अब तक नहीं बन सका है। खेती के लिए जमीन भी नहीं है। दुकान से राशन महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है।
पनियरा क्षेत्र के कुआचाप छावनी टोला की रहने वाली हिना ने बताया कि दस डिस्मिल खेत है। मजदूरी करके जीवन यापन किया जा रहा है। दो माह से राशन बनवाने के लिए चक्कर लगा रही हूं। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कुछ नहीं हुआ।
कुआचाप गांव के इब्राहिम एवं शाह आलम ने बताया कि हम लोग भूमिहीन हैं। पात्र होने के बाद भी राशन कार्ड नहीं बन सका है। राशन कार्ड के लिए गांव के कोटेदार से कई बार कहा गया। ब्लॉक पर भी दो बार शिकायत की। राशन कार्ड नहीं रहने से परेशानी हो रही है। इसी गांव के ताज मोहम्मद व सलमान ने बताया कि राशन कार्ड नहीं बना है।
ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर निवासी राजमती ने बताया कि 12 डिस्मिल खेत है। राशन कार्ड अब तक नहीं बन सका है। पति बैलगाड़ी चलाकर किसी तरह परिवार का पालन पोषण करते हैं। राशन कार्ड बनाने के लिए छह माह से चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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राशन कार्ड बनाने के लिए जरूरी प्रपत्रों को जमा करना पड़ता है। सभी जरूरी प्रपत्रों के साथ जो आवेदन मिलते हैं, उनका राशन कार्ड बनाया जाता है। जितने भी कार्ड धारक हैं, उनको प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शिता के साथ राशन दिया जा रहा है।
एपी सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी