लापरवाह पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी तो मृतक की छोटी बेटी बोली अब मिला सुकून
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दुष्कर्म जैसा गंभीर आरोप लगाकर बयान से पलटने वाली युवती अब खामोश है। वह कुछ बता नहीं रही है। वहीं, उसकी छोटी बहन ने अपनी कही। कहा कि जैसी करनी वैसी भरनी। उधर, पीड़ित सभी बहनों व भाई को उनके एक रिश्तेदार के घर रखा गया है। आरोप है कि छोटी बहन के साथ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष ने छेड़छाड़ की थी। छोटे भाई को मारा-पीटा था। सदमे में पिता ने जहर खाकर जान दे दी थी।
छोटी बहन ने कहा कि जैसी करनी वैसी भरनी। पुलिस ने जैसा हमलोगों के साथ किया, उनके साथ भी उसी तरह से कार्रवाई हुई है। शुरुआत में ही हमलोगों की बात सुन ली गई होती तो पिता की मौत नहीं होती। गंदी हरकत को भाई ने देखा तो उसे पीटा गया। शिकायत लेकर कोतवाली व नगर पुलिस चौकी में पहुंची तो कायदे कानून का पाठ पढ़ाकर वापस कर दिया गया। 28 अगस्त को मामला कोतवाली में पहुंचा था तो बड़ी बहन ने सब कुछ बताया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हमलोगों को दबा दिया गया। इससे पिता को गहरा सदमा लगा, वह ज्यादती बर्दाश्त नहीं कर सके। भाजपा नेता घटना के बाद से ही धमकी देता रहा। रकम देने की बात पर वह कुछ नहीं बोली।
अपनी बड़ी बहन को बयान से पलटने के बारे में भी उसने कुछ नहीं कहा। उधर, बड़ी बहन अब भी खामोश है। सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस की ओर से उनको न बोलने की हिदायत दी गई है। इस वजह से दोनों बहुत कुछ कह नहीं पा रही है। यह कार्रवाई होने की बात सुनकर छोटी बहन ने कहा कि अब उम्मीद जग रह है कि हम लोगों के साथ न्याय होगा। शासन सत्ता की सख्ती का असर दिख रहा है।
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भाजपा नेता के करीबियों पर शिकंजा, ताबड़तोड़ हो रही छापामारी
कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया जिले में पुलिस ने डाला छापा, नहीं मिली सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष की मुश्किल बढ़ गई है। उनको बचाने का प्रयास करने वालों पर कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस टीम लगातार छापा डाल रही है, लेकिन सफलता अब तक नहीं मिली है। पुलिस उसके शुभचिंतकों के जरिए पता लगाने की कोशिश कर रही है।
सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस छह से अधिक से पूछताछ कर रही है। यह सभी उसके करीबी हैं। उनके बताए गए पतों पर पुलिस टीम पहुंचकर छापा डालने में जुटी हैं। शुरुआत में बयान होने के बाद पुलिस को लगा कि अब तो मामला ठंडा हो जाएगा, लेकिन 24 घंटे के अंदर पूरी कहानी पलट गई। उच्चाधिकारियों के संज्ञान लेते ही कार्रवाई के लिए पुलिस हवा में तीर मारने लगी। पुलिस छेड़छाड़ व मारपीट के मामले को नजरंदाज कर दिया। उसे लगा की सब कुछ सामान्य हो जाएगा। थोड़ी चूक ने पुलिस की मुश्किलों को बढ़ा दिया। वैसे में कोतवाली पुलिस को मामला रफा दफा करने का पुराना तर्जुबा है। हर बार की तरह इस बार भी चकमा देकर मामने को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही थी। मामला ऊपर तक पहुंचने के बाद उच्चाधिकारी खुद रुचि लिए तो विवश होकर कार्रवाई को आगे बढ़ाना पडा। जिस भाजपा नेता का पुलिस हमदर्द बनी थी, वही उसके लिए मुसीबत बन गई है। पड़ाेसी जिले कुशीनगर, देवरिया व सिद्धार्थनगर में टीम छापा डाल रही है। सटीक लोकेशन नहीं मिलने के कारण उसका पता नहीं चल पा रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि शनिवार रात में कसया से उनके अपने घर पर महराजगंज फोन मिलाया था, इसकी भनक पुलिस को लगी तो टीम ने वहां छापा डाला। उसका वहां भी पता नहीं चल सका। अब उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए सिर दर्द बन चुकी है।
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम गिरफ्तारी के प्रयास में लगी है। जल्दी सफलता मिल जाएगी।
दुष्कर्म से मुकरी तो अन्य मामलों में गंभीरता क्यों नहीं दिखाई?
महराजगंज। सदर कोतवाली में एक साथ बड़ी कार्रवाई की चर्चा दिन भर शहर में होती रही। शहर के लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए उच्चाधिकारी के सख्ती की सराहना की। शहर के दवा कारोबारी प्रवीण सिंह ने कहा कि गंभीर मामलों में पुलिस प्राथमिक स्तर पर चूक कर देती है, इस वजह से मामला बड़ा हो जाता है। पीड़ित को त्वरित न्याय मिलने की मंशा पर पानी फिर जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में भी शुरूआत में शांति भंग की कार्रवाई हुई थी। दूसरी बार में केस भी दर्ज हुआ तो बयान में सिर्फ दुष्कर्म की बात से पीड़िता मुकरी थी, अन्य आरोपों पर पुलिस ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई। उच्चाधिकारियों की सतर्कता के कारण यह कार्रवाई हुई। अब पीड़ितों को न्याय मिलने की राह आसान हो गई है। वरुण त्रिपाठी भी इस मासले पर कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आरोपी को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए।
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लचर कार्रवाई की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहती कोतवाली पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। करीब दो माह पहले दुष्कर्म के आरोपी सब रजिस्ट्रार प्रकरण में कोतवाली पुलिस सुर्खियों में रही। मामले उलझाने में कोतवाली पुलिस की यह कोई पहली घटना नहीं है। पीड़ित को न्याय मिले या न मिले, आरोपी के बचाव की व्यवस्था नियमानुसार कोतवाली पुलिस कर देती है।
दुष्कर्म का आरोप झेल रहे सब रजिस्ट्रार को गिरफ्तार करने की मांग पीड़िता करती रह गई, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी। मामला लंबा खिंचा तो हाई कोर्ट से स्टे मिल गया। पुलिस न्यायालय के आदेश की बात कर पल्ला झाड़कर किनारे हो गई। उस वक्त प्रत्येक दिन शहर में इस बात को लेकर चर्चा हो रही थी कि आखिर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया। अब दूसरा मामला सामने आया। इसमें हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़, मारपीट समेत अन्य धारा में केस दर्ज हुआ। बाद में बयान हुआ तो पीड़िता ही बयान में दूसरी बात कर दी। दुष्कर्म होने की बात नहीं की। यहीं से पुलिस आराम की मुद्रा में आकर आरोपी को ही बचाने में जुट गई। आरोपी सत्ताधारी दल भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा का जिलाध्यक्ष है। इन मामलों को लेकर कोतवाली पुलिस की कार्य प्रणाली पर लोगों ने सवाल खड़ा किया।