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Maharajganj News: मिलावट का खेल... कपड़े वाले टीनोपाल से चमका रहे मिठाइयां

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जांच करने पहुंची खाद्य विभाग की टीम।
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महराजगंज। दीपावली पर खील बताशा खरीदते समय सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि बताशा और चीनी से बनने वाली मिठाई को चमकीला व आकर्षक बनाने में बेंजीन सल्फोनिक उपयोग किया जा रहा है, जो सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। अब तक चीनी से तैयार होने वाली इन मिठाइयों को मिलावट मुक्त समझा जाता था, लेकिन कारोबार बढ़ाने के लिए सेहत से खिलवाड़ करने का खेल प्रभावी है। कपड़ों की चमक बढ़ाने में प्रयुक्त होने वाली टीनोपाल व रानीपाल त्योहार में खोजे नहीं मिल रही। अचानक बाजार से इनके गायब होने के पीछे चीनी से बनने वाली मिठाइयों में इनका प्रयुक्त होना माना जा रहा। त्योहार की तैयारियां लगभग हर घर में जोरशोर से की जा रही है। प्रकाश पर्व में नई खरीद की परंपरा के तहत खरीद की सूची बन गई है। त्योहार में सभी खरीदारी के साथ लक्ष्मी गणेश की नई मूर्ति भी खरीदी जाती है। त्योहार पर मिठाई में भी अपनी- अपनी पसंद है, लेकिन बच्चों, किशोरों के साथ-साथ युवाओं को बताशा और चीनी से तैयार गट्टा व हाथी घोड़े की आकृति वाली मिठाई खूब भाती है। गट्टा तो वयोवृद्ध भी खूब खाते हैं, क्योंकि यह मुंह में डालते ही घुलने लगती। बिना दांत के हो चुके वृद्ध बड़े चाव से यह मिठाई त्योहार में मंगाते हैं, लेकिन इस बार बताशा से लेकर चीनी निर्मित मिठाइयों की खरीद करते समय सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि जनपद में चीनी से मिठाई तैयार करने वाले स्थानीय और बिहार के कारीगरों ने न सिर्फ डेरा डाल रखा है, बल्कि कारोबारियों से ऑर्डर लेकर निर्माण शुरू कर चुके हैं।
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