लक्ष्मीपुर। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर रेंज में स्थित ब्रिटिश काल में निर्मित वनविश्रामालय टेढ़ीघाट बदहाल है। कुछ वर्ष पहले अधिकारियों और मंत्रियों के ठहरने से गुलजार रहने वाला डाक बंगला अब वीरान पड़ा है। विभागीय उपेक्षा का शिकार हो गया है। आधुनिकता की दौड़ में इसकी महत्ता गिरावट आई है।
जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मीपुर रेंज कार्यालय से 15 किमी दूर जंगल में अंग्रेजों की ओर से वर्ष 1939 में टेढ़ीघाट में वनविश्रामालय का निर्माण कराया गया था। जंगल की निगरानी करने के लिए सभी सुविधाओं से सुसज्जित दो गेस्ट हाउस बनाए गए थे। डाक बंगले पर एक भोला नाम का विभागीय हाथी रखा गया था। जिस पर रेंज अफसर सवार होकर जंगल की निगरानी करते थे।
ट्राम वे रेल के अफसर भी इसी में रुकते थे। उस समय अंग्रेजों के लिए चर्चित डाक बंगले में इसका नाम शामिल था। लेकिन वर्तमान में इसकी हालत काफी दयनीय हो गई है। हालांकि पिछले दिनों इसकी मरम्मत कार्य विभागीय अधिकारियों ने कराया। लेकिन समुचित देखभाल नहीं होने के कारण आलीशान भवन का अस्तित्व खतरे में है।
वर्तमान में गुमनाम और बदहाली की हालत में फारेस्ट गेस्ट हाउस टेढ़ीघाट है। यहां से मात्र 25 किमी दूरी पर पड़ोसी मुल्क नेपाल की सीमा है और 4 किमी दूरी पर गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह का प्राचीन टीला स्थित है। जहां पर्यटकों और अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। अगर इस ऐतिहासिक धरोहर वनविश्रामालय के संरक्षण पर जोर दिया जाए तो नेपाल जाने वाले पर्यटकों का भी आवागमन हो सकता है, जिससे विभाग को आमदनी भी हो सकती है। लेकिन इस पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों का ध्यान नहीं पड़ रहा है।
रेंजर केके गुप्ता ने बताया कि टेढ़ीघाट डाक बंगला का मरम्मत विभागीय अधिकारियों की देखरेख में हुआ है। कुछ कमी होगी तो उसे भी दूर कर लिया जाएगा।