महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्रों में युवा तकनीकी प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ऐसे युवाओं की संख्या 200 के करीब है, जिन्होंने प्रशिक्षण लेकर अपना काम शुरू किया और अब उनकी घर गृहस्थी आसानी से चल रही है। ऐसे युवकों में कम पढ़े-लिखे युवा ही नहीं, बल्कि एम कॉम तक शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक भी शामिल हैं। रोजगार नहीं मिलने से युवा परेशान थे। थक-हारकर उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण लिया और फिर अपना काम शुरू किया। शुरुआती दौर में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन काम धीरे-धीरे चल पड़ा। अब उनकी गृहस्थी की गाड़ी आसानी से चल रही है। ऐसे युवाओं का कहना है कि उन्होंने काफी समय गंवाया। शुरुआत में ही तकनीकी प्रशिक्षण ले लेना चाहिए था।
इन गांवों के युवा ले रहे तकनीकी प्रशिक्षण
सीमावर्ती क्षेत्र हरदीडाली, कैथवलिया उर्फ बरगदही, खनुआ, महुअवा, आराजी सरकार उर्फ अरघा, आराजी सरकार उर्फ बैरिहवा, चंडीथान, छपवा, सिंघोरहवा, कौलही, बरवाभोज, बरवाखुर्द, बरवाकला, पुरैनिहा, बरगदवा उर्फ गनवरिया, शेख फरेंदा, धौरहरा, सम्पतिहा, जगरनाथपुर, जारा, श्यामकाट, मुड़िला।
एम कॉम कर बेरोजगार था, अब चला रहे कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र
नौतनवा तहसील क्षेत्र के सिंघोरहवा निवासी प्रदीप मद्धेशिया एम कॉम तक शिक्षा ग्रहण की है। डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने रोजगार की तलाश शुरू की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। बेरोजगारी ने उन्हें तनाव में ला दिया। इसी बीच, उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण लेने का फैसला किया। नौतनवां के एक टेक्निकल कॉलेज से वर्ष 2017 में दो वर्ष का एडीसीए और टैली का कोर्स किया। इसके बाद वर्ष 2019 में नौतनवा के एक कंप्यूटर संस्थान में उन्हें नौकरी मिल गई। कुछ दिन वहां काम करने के बाद उन्होंने नौतनवा गांधी चौक पर किराए का मकान लिया और अपना कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र खोल लिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता किसान हैं। परिवार में छह सदस्य है। परेशानी मुश्किल से गुजारा चलता था, लेकिन अब गृहस्थी की गाड़ी आसानी से चल रही है।
तकनीकी जानकारी ने आसान कर दी जिंदगी
सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदीडाली गांव के बिचला टोला निवासी हिमांशु मिश्र ने स्नातक तक पढ़ाई की है। परिवार में छह सदस्य हैं। डिग्री हासिल करने के बाद भी काम नहीं मिलने से परेशान थे। फिर सात वर्ष पहले नौतनवा के एक टेक्निकल कॉलेज से रेडियो, टीबी आदि बनाना सीखा और हरदीडाली चौराहे पर किराए का मकान लेकर रेडियो व टीवी की मरम्मत का काम करने लगे। उन्होंने बताया कि इससे होने वाली आय से दो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ ही पत्नी और माता-पिता का भरण पोषण आसानी से कर लेते हैं।
तकनीकी जानकारी हो तो काम की कमी नहीं
हरदीडाली निवासी श्याम मोहन चौधरी का कहना है कि भले ही बेरोजगारी है, लेकिन तकनीकी जानकारी हो तो काम की कमी नहीं है। उन्होंने चार वर्ष पहले नौतनवा के एक टेक्निकल कॉलेज से बिजली मिस्त्री का कोर्स किया। लगभग दो वर्षों से वह क्षेत्र में घरों में बिजली वायरिंग, मोटर बाइंडिंग आदि का काम कर रहे हैं। परिवार में पांच सदस्य हैं, लेकिन भरण-पोषण में कोई परेशानी नहीं होती। जिंदगी की गाड़ी आसानी से चल रही है।
तकनीकी प्रशिक्षण हो तो काम चलकर आता है
हरदीडाली निवासी रामजतन चौधरी ने आज के समय में तकनीकी जानकारी जरूरी है। ऐसा हो तो काम चलकर आपके पास आता है। उन्होंने बताया कि दस वर्ष पहले नौतनवा में बाइक मरम्मत का काम सीखा। इसके बाद सात वर्ष से हरदीडाली चौराहे पर किराए का मकान लेकर बाइक मरम्मत का काम करते हैं। बाइक मरम्मत का काम सीखाते भी हैं। परिवार में पांच सदस्य हैं। प्रतिमाह इतनी आमदनी हो जाती है कि गृहस्थी आसानी से चल सके।