महराजगंज। बेसिक शिक्षा विभाग में अब शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध करने की कार्रवाई नहीं होगी। महानिदेशक ने नियमावली के अनुसार कार्रवाई करने के लिए बीएसए को निर्देशित किया है।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और विभागों में कार्यरत शिक्षक और कर्मचारियों का वेतन अब दंड के नाम पर नहीं रोका जा सकेगा। गड़बड़ी करने पर नियमावली के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी, जो कि मानव संपदा पोर्टल पर ई-सर्विस बुक पर दर्ज भी होगी, जिससे उनके प्रमोशन के चांस कमजोर होंगे। महानिदेशक कंचन वर्मा ने पत्र जारी करते हुए वेतन अवरुद्ध करने की कार्रवाई को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वेतन अवरुद्ध करना विधिक दंड नहीं है। शिक्षक और कर्मचारियों को उनकी अनियमितताओं और गलतियों के लिए नियमावली के अनुसार दंडित किया जाए।
हर निरीक्षण में अनुपस्थित मिले शिक्षकों के वेतन रोके जाते हैं, बाद में उन्हें बहाल कर दिया जाता है। ऐसी कई शिकायतें शिक्षक संगठनों की ओर से महानिदेशक को की गई थी, जिसमें कहा गया था कि वेतन रोकने और बहाल करने में भ्रष्टाचार होता है। इसे देखते हुए फैसला लिया गया। बता दें कि जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1703 स्कूल हैं। जहां शिक्षकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए वेतन बाधित करने की कार्रवाई होती रही है।
पिछले दिनों परिषदीय स्कूलों में परीक्षा का निरीक्षण करने के दौरान बीएसए ने कुछ अध्यापकों का वेतन बाधित, कार्य में लापरवाही तो कुछ का कंपोजिट ग्रांट न खर्च करने पर कार्रवाई की थी। विभाग के अनुसार अब ऐसा सिर्फ चेतावनी देने के लिए किया जाएगा, जिससे उनकी सर्विस बुक में बैड इंट्री न होने पाए।
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पहले भी शिक्षकों को दंड सिर्फ कार्यशैली में सुधार को लेकर दिया जाता था। वेतन बाधित करने की प्रक्रिया भी उसी के अंतर्गत थी। महानिदेशक के पत्र का संज्ञान लिया गया है अब अधिक दिनों तक वेतन बाधित करने की जगह मानव संपदा पोर्टल पर इंट्री दर्ज कर कार्यशैली बताई जाएगी।
-श्रवण गुप्ता, बीएसए, महराजगंज