महराजगंज। शहर में संचालित दुकानों का सर्वे किया जा रहा है। अगस्त में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। दुकानों पर लगने वाले टैक्स से नगर में जन सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। अब तक 250 दुकानों का सर्वे हो चुका है।
नगर पालिका क्षेत्र में विभिन्न वार्ड के आवासीय भवनों में मेडिकल स्टोर, किराना स्टोर, होटल सहित अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे आवासीय भवन बढ़े कर के दायरे में आ सकते हैं। नगर पालिका परिषद में 12 हजार भवन स्वामी गृहकर के लिए पंजीकृत हैं। नए नियम के मुताबिक कुल भवनों में से 22 प्रतिशत भवन आवासीय से व्यावसायिक श्रेणी में आ सकते हैं। व्यावसायिक उपयोग में आ रहे भवनों का सर्वे कराकर डाटा संकलित किया जा रहा है।
शहर में नगर पालिका प्रशासन की टीम सर्वे में जुटी है। दुकानों का सर्वे पूरा होने के बाद नियम के अनुसार शुल्क का निर्धारण होगा। वहीं दूसरी ओर गृहकर वसूली में भी तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। जारी हुए नए शासनादेश के तहत महराजगंज नगर पालिका में नियम लागू नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सहमति बनने पर नए नियम के तहत शुल्क का निर्धारण हो सकता है।
कच्चे मकान व खाली जमीन भी आ सकते हैं दायरे में
प्रमुख सचिव नगर निकाय अनुभाग 9 की ओर से जारी पत्र में नियमाें की जानकारी दी गई है। आदेश के तहत कच्चे मकान व खाली जमीन के स्वामियों को भी कर के दायरे में लाने की व्यवस्था हो सकती है। चार प्रकार के मार्गों पर वार्डवार अवस्थित संपत्ति का निर्धारण होगा। 24 मीटर से अधिक चौड़ाई वाले मार्ग पर बने आरसीसी छत वाले पक्के मकान, सामान्य पक्के मकान, कच्चे मकान व खाली पड़ी भूमि के स्वामियों पर कर लगाया जाएगा। 12 से 24 मीटर चौड़े, 9 से 12 मीटर व नौ मीटर चौड़ी सड़क पर भी संपत्तियों का निर्धारण होगा। सर्किल रेट अथवा क्षेत्र में तत्कालीन किराया दर के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा।
यह प्रति इकाई क्षेत्रफल वर्ग फुट अथवा वर्ग मीटर के अनुसार लागू किया जाएगा। आवासीय, व्यावसायिक व भूमि की गणना करने के बाद दर तय होगा। कर का भुगतान अधिसूचित बैंक, नपा कार्यालय में जमा होगा। चेक व ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी भवन स्वामियों को दी जाएगी। निर्धारित समय तक तय कर राशि का भुगतान न जमा होने पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी वसूल किया जाएगा। 50 वर्ग मीटर पर 100 रुपये, 200 वर्ग मीटर पर 1000, 400 वर्ग मीटर तक के निर्माण पर 5000 रुपये तक कर लगाने की बात नए शासनादेश में उल्लेखित है। शासनादेश को प्रभावी बनाने के बाद उक्त दर सर्किल रेट के अनुसार घट-बढ़ सकती है।
डिजिटल माध्यम से भी भवन स्वामियों तक बिल पहुंचाई जाएगी
नया नियम शहर में लागू नहीं किया गया है, लेकिन इस पर विचार किया जा रहा है। इसे लागू करने के बाद नगर निकाय का राजस्व बढ़ेगा। इससे बिजली, पानी, नाली आदि की सुविधा आवासीय व व्यावसायिक भवनों तक पहुंचाई जाएंगी। छह माह में पुनरीक्षण व हर माह वसूली की समीक्षा होगी। बिल और मांग की नोटिस ईमेल व डिजिटल माध्यम से भी भवन स्वामियों तक पहुंचाई जाएगी।