निलंबित सिपाही ही वसूली की रकम एआरटीओ तक पहुंचाता था, सितंबर 2021 में सामने आया था निलंबित सिपाही मानसिंह का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। ओवरलोड ट्रकों से वसूली का मास्टर माइंड निलंबित प्रवर्तन सिपाही मान सिंह था। ओवरलोड ट्रक से वसूली के खेल में वह नया नहीं है। वसूली के धंधे का मामला जब 2021 में सामने आया था तो उस वक्त भी इसमें महराजगंज में तैनात निलंबित एआरटीओ में तैनात सिपाही मानसिंह का नाम सामने आया था। आरोप लगा था कि उसी के जरिए वसूली की रकम एआरटीओ तक जाती थी। एसआईटी की जांच में 16 जिलों के एआरटीओ के नाम इस धंधे में सामने आया था, लेकिन प्रवर्तन दल के सिपाही मान सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
सूत्रों की मानें तो जेल में बंद निलंबित सिपाही मान सिंह सितंबर 2021 में तब सुर्खियों में आया था, जब एसआईटी की जांच में 16 एआरटीओ फंसे थे। उस वक्त महराजगंज का नाम आते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया था। इधर जिले में वसूली के खेल का पर्दाफाश होने पर भी मान सिंह फिर से फंस गया। बताया जा रहा है कि वसूली की पूरी रकम इन्हीं के भरोसे जाती थी। सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक माह 20 लाख से ज्यादा की वसूली होती थी। पूरी रकम में सभी का हिस्सा तय रहता था। एक तिहाई हिस्सा अधिकारी का होता था, शेष रकम में सभी का बंटवारा होता था। कार्यालय में प्रभाव की वजह से कोई मुंह नहीं खोलता था। अधिकारियों के जेल जाने के बाद अब कलई खुल रही है।
पीड़ित कुछ कहने की हिम्मत जुटा रहे हैं। वाहनों के कारोबार से जुड़े लोगों के कामकाज में मोटी रकम की वसूली की जाती थी। खासकर ट्रक व बसों से जुड़े काम में ज्यादा रकम की वसूली की जाती थी। बताया जाता है कि वसूली का मास्टरमाइंड निलंबित सिपाही था, उसी के जरिए वसूली का पूरा खाका बनाया जाता था। सूत्रों के अनुसार विभाग में निलंबित सिपाही की पैठ का अंदाजा इस बात से लगता है कि एआरटीओ के रहने के लिए होटल में जो कमरा लिया गया था, उसकी बुकिंग निलंबित सिपाही की आईडी पर हुई थी। अधिकारी के रहने खाने से लेकर पूरी व्यवस्था इसी के जिम्मे रहता था।
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की विवेचना सीओ फरेंदा की ओर से की जा रही है।
वसूली के दौरान सादे ड्रेस में तैनात रहते थे कर्मी
वसूली के आरोप फंसने के बाद एआरटीओ समेत अन्य कर्मियों के काम के तरीकों की पोल खुल रही है। नौतनवां कस्बे सरोजनी नगर के रहने वाले बिरजू ने भी तहरीर देकर वसूली का आरोप लगाया था। बिरजू ने बताया कि हाईवे पर वसूली के दौरान कर्मी सादे ड्रेस में रहते थे। प्रवर्तन के सिपाही भी ज्यादातर ड्रेस में नहीं रहते थे। मामला बिगड़ने के बाद ड्रेस में प्रवर्तन के सिपाही सामने आते थे।
निजी या किराए की गाड़ी लेकर की जाती थी वसूली
सूत्रों ने बताया कि वसूली के दौरान कर्मी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करते थे। किराए पर या निजी गाड़ी लेकर वसूली की जाती थी। पहचान छिपाने के लिए ऐसा किया जाता था। ओवरलोड ट्रकों से वसूली के दौरान कभी कभार मारपीट की नौबत आ जाती थी।
सहमे हैं कि एआरटीओ कार्यालय के कर्मी
मामले की पोल खुलने के बाद ही एआरटीओ कार्यालय में तैनात कर्मी सहमे हुए हैं। उनको डर है कि जांच की आंच कहीं उन तक न पहुंच जाए। दिन में ज्यादातर कर्मियों के कक्ष खाली रहते हैं। कर्मियों में चर्चा है कि यह सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। एआरटीओ कार्यालय में अब कभी इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। प्रकरण की विवेचना हो रही है, इससे अन्य को गिरफ्त में आने का डर सता रहा है।