काले कारनामे को छुपाने के कार्यालय में आग लगाकर दस्तावेजों का नष्ट कर किया गया था प्रयास, अधिकारियों की सख्ती से खुला राज
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। बिजली निगम में 3.62 लाख बिल में हेराफेरी के मामले में कदम कदम पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। मामले में शामिल आरोपी अधिकारियों ने अपनी कथनी करनी को छिपाने के लिए खूब खेल खेला, लेकिन निगम के अधिकारियों की सख्ती से उनके काले कारनामे की पोल खुलती गई। कभी कार्यालय में आग लगाने की कोशिश की गई तो कभी जांच को प्रभावित करने का प्रयास हुआ।
जानकारी के अनुसार, 28 सितंबर 2022 को करीब 11 माह पहले बिजली निगम में बिजली बिल में हेराफेरी कर विभाग को चूना लगाने की पोल खुली तो एक्सईएन, जेई समेत कई कर्मियों पर गाज गिरी थी। इस प्रकरण की जांच चल ही रही थी तो दो माह पहले कार्यालय में आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। विभाग ने अपनी किरकिरी होता देख आनन-फानन कार्रवाई की। दो लिपिकों पर वर्तमान में हुई कार्रवाई से यह पता चल रहा है कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। वर्तमान में हुई कार्रवाई लेकर बिजली निगम के दफ्तर खलबली मची गई। जांच की आंच कभी कुछ कर्मियों पर पड़ने वाली है।
सभी अपने बचने के जुगाड़ में हैं। हेराफेरी का कोई सबूत नहीं मिले, इसके लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। बिजली निगम के उच्चाधिकारियों की नजर प्रत्येक हलचल पर है। विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि हेराफेरी में शामिल अधिकारी बचाव की पूरी युक्ति अपना रहे हैं। पहले तो वे यह व्यवस्था किए कि कोई सबूत हाथ न लगे, क्योंकि हेराफेरी से जुड़ा कोई तथ्य हाथ नहीं लगेगा तो आसानी से बच निकलेंगे।
पहले ये अधिकारी मिले थे कसूरवार
गलत तरीके से बिल सुधार कर निगम को चपत लगाने में महराजगंज खंड के एक्सईएन हरिशंकर, उपखंड प्रथम के एसडीओ ईश्वर शरण सिंह, खंड के लिपिक कार्यकारी सहायक रुद्र प्रताप पांडेय, राजकपुर गौड़, व अविनाश मणि पांडेय दोषी पाए गए थे। ऊर्जा निगम के चेयरमैन एम देवराज ने महाराजगंज के दो अभियंता और तीन लिपिकों को निलंबित कर दिया था। तीनों लिपिकों को पूर्वांचल एमडी कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। उन पर आरोप लगा था कि इन्होंने नियम विरुद्ध बिलों में सुधार के नाम पर वित्तीय हेरफेर की। अभी उनके खिलाफ मंगलवार को महाराजगंज कोतवाली में अधीक्षण अभियंता महाराजगंज ने 3.62 लाख रुपये राजस्व गबन का मुकदमा भी दर्ज कराया था।
महराजगंज से नौ दिन पहले निचलौल कार्यालय में लगी थी आग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। बिजली निगम के कार्यालय में आग लगने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। महराजगंज उप खंड कार्यालय में आग लगने की घटना के नौ दिन पहले की निचलौल कार्यालय में आग लगी थी। आगे पीछे कार्यालय में आग लगने की घटना ने बिजली निगम के उच्चाधिकारियों को सोचने पर विवश कर दिया। काले कारनामे को आग में जलाने की कोशिश की गई ताकि कोई सबूत न बचे।
महराजगंज वितरण खंड के संयुक्त उपखंड कार्यालय में 14 व 15 जून 2023 की रात आग लग गई थी। आधी रात को कार्यालय से धुआं निकलता देख वर्कशाप का गार्ड पास स्थित बिजली कर्मचारी आवास पर पहुंचा। कार्यालय से धुआं निकलने की जानकारी दी थी। कार्यालय में लगी आग को लेकर चेयरमैन ने जांच टीम गठित की थी। आग की घटना में दो लिपिक व तीन एसडीओ दोषी मिले। बृहस्पतिवार को अधीक्षण अभियंता महाराजगंज ने दो लिपिकों क्रमश: कार्यकारी सहायक गुलाब चंद साहनी व अतुल कुमार यादव को निलंबित कर दिया।
विद्युत वितरण उपखंड कार्यालय निचलौल में पांच जून 2023 की रात को अचानक आग लग गई। जिसके बाद विभाग के जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया था। विभाग के कार्यालय में रखे सामान व जरूरी दस्तावेज जल कर राख हो गए थे। जिम्मेदार आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताए। कमरे में रखे गए वित्तीय वर्ष 2022-23 तक के सभी रजिस्टर एवं पत्रावली, बिल रिवीजन रजिस्टर और उससे संबंधित कागजात, पीडी रजिस्टर, न्यू कनेक्शन के कागज तथा लोड रजिस्टर के कागज सहित कई अन्य जरूरी कागज जल चुके थे।
पूरे प्रकरण की जांच हो रही है। आरोप तय होने पर कार्रवाई भी हो रही है। उच्चाधिकारी प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखे हैं। जांच में जो भी कसूरवार मिलेगा, उसपर कार्रवाई होनी तय है।
वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता