बापू के ठहरने के लिए घुघली स्थित लाला केशर लाल नारंग से चीनी मिल के गेस्ट हाउस की मांग की गई। नारंग ने हामी भी भर दी, लेकिन तत्कालीन अंग्रेज डीएम के खौफ से उन्होंने मना कर दिया। वह ताला बंद कर नैनीताल चले गए। इसकी जानकारी जब गांधी जी को हुई तो ने उन्होंने मुंशी छत्रधारी लाल के यहां ही ठहरने की इच्छा जताई।
बकौल बेचना देवी, उन दिनों मैं मुंशी छत्रधारी लाल के यहां काम करती थी। बापू आए तो उन्होंने मुंशी जी की पत्नी के हाथ की बनी मूंग की दाल व रोटी खाई। भावुक हो चुकीं बेचना देवी बताती हैं कि भोजन के दौरान बापू को उन्होंने खुद पानी दिया था। जीवन का वह पल कभी नहीं भूलता है।