महराजगंज। सीमा पर सुरक्षा जवानों ने सख्ती बढ़ाई तो तस्कर हाईटेक हो गए। वह मोबाइल पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर नेपाल से कपड़े का आर्डर ले रहे हैं। सूरत, कानपुर, दिल्ली से कपड़ों की खेप मंगाकर पगडंडियों के रास्ते आसानी से नेपाल पहुंचा दे रहे हैं। इससे राजस्व की हानि हो रही है। दीपावली तक यह धंधा 10 करोड़ से ऊपर होने का अनुमान है।
सूत्रों की माने ताे धंधेबाजों ने नेपाल से सीमावर्ती कस्बों तक ग्रुप बनाया है। उसमें कपड़ों की अलग-अलग वैरायटी भेजकर पसंद करने के बाद आर्डर लिया जाता है। सब कुछ पुख्ता होने के बाद नेपाल में ही खोले गए खाते में रकम जमा कर लेते हैं, इसके बाद कैरियर के जरिए कपड़े को नेपाल पहुंचा दिया जा रहा है।
तस्कर सुरक्षित और सुविधाजनक रास्तों से कपड़े पहुंचा रहे हैं। तस्कर मोबाइल ग्रुप पर कोड के जरिये संपर्क बनाए रखते हैं। यही कारण है कि सरहद से आसानी से पार्सल में कपड़े भारी मात्रा में नेपाल पहुंच रहे हैं।
सरहद पर तैनात जवानों को इसकी भनक तक नहीं लगती है। ऑनलाइन पार्सल की तरह नकल करते हुए कस्बे के कुछ व्यापारी ऑनलाइन पैकिंग कर कपड़े को बाइक सवार युवकों को देते हैं। युवक एक से दो पैकेट को बड़े ही आसानी से नेपाल भैरहवा और बुटवल तक डिलेवरी कर देते हैं। इसके बदले प्रति पैकेट 500 रुपये कैरियर को शुल्क मिलता है।
एक कैरियर ने बताया कि मोबाइल पर कोड के जरिये दोनों देशों के तस्कर संपर्क में रहते हैं और सरहद पर उन जगहों पर पैकेट मंगवा लेते हैं जहां पर पुलिस की नजर नहीं रहती है।
नौतनवा थाना क्षेत्र के संपतिहां, छपवा, सुंडी, खनुवा, हरदीडाली, कैथवलिया, भगवानपुर और सोनौली का दो नंबर गली बरगदवा बाजार, परसामलिक, ठूठीबारी, झूलनीपुर है, जिसके रास्ते तस्कर धंधा करते हैं।