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Maharajganj News: भुटकी निकालकर तस्कर हो रहे मालामाल...विभाग को राजस्व का नुकसान

Tue, 11 Jun 2024 04:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज/निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत सेंचुरी वन क्षेत्र के जंगलों में बरसात के मौसम में उगने वाली भुटकी निकालकर तस्कर मालामाल हो रहे हैं। भुटकी स्पष्ट रूप से दिखे इसलिए तस्कर जंगल में आग लगा देते हैं। झाड़ियों और पत्तों के साथ पेड़ जलकर राख हो जाते हैं। इससे वन विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भुटकी तस्करों के लिए काला सोना होता है। तस्कर इस जंगली सब्जी की तस्करी करने के लिए बरसात से पहले ही जुट जाते हैं। भुटकी सब्जी सीमावर्ती बाजारों के साथ ही नेपाल भी भेजी जाती है। स्थानीय बाजार में यह 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिकती है, जबकि बड़े शहरों में 700 से 800 रुपये किलो पहुंच जाती है। नेपाल के बाजारों में यही सब्जी 1200 से 1400 रुपये किलो मिलेगी। साल में महज डेढ़ दो महीने मिलने वाली भुटकी बाजारों में मिलने लगी है।

मधवलिया वन रेंज के वनकर्मियों ने रविवार को तीन आरोपियों को बड़ी मात्रा में भुटकी के साथ पकड़ा था। मधवलिया वन क्षेत्र पूरी तरह से सेंचुरी वन क्षेत्र में आता है। इसलिए जंगल में प्रवेश करना और भुटकी बीनना कानूनन अपराध है। बावजूद तस्कर जंगल के नियमों को ताक पर रखकर भुटकी की तस्करी में जुटे रहते हैं।
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शाकाहारियों का कहा जाता है मटन
लोगों के मुताबिक सावन के पवित्र महीने में जब लोग चिकन, मछली और मटन खाना बंद कर देते हैं तो भुटकी उनके लिए मांसाहारी भोजन का विकल्प बन जाती है। लिहाजा इसे शाकाहारियों का मटन भी कहा जाता है। ऐसे में इस महीने इसकी डिमांड कुछ अधिक ही बढ़ जाती है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक उत्पाद है। इसकी खेती नहीं की जा सकती। ये खास तरह की परिस्थिति में अपने आप ही पैदा होता है। वैसे ये तस्करों को मुफ्त में ही मिलता है। जिसे वह मोटी रकम में बेचते हैं। यह एक फंगस है, इसलिए यह वजन में काफी हल्का होता है। इनके मुताबिक इसका स्वाद मटन के कलेजी की तरह होता है। इसलिए इसकी बड़ी डिमांड होती है।


शरीर में प्रोटीन-कैल्शियम और खून की करती है पूर्ति
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल के अधीक्षक डॉ. अंग्रेस सिंह ने कहा की भुटकी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिज तत्व पाये जाते हैं, जो कि इसे पौष्टिक बनाते हैं। वहीं कुपोषण, दिल और पेट के रोगों में भी ये फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में जंगलों में मिलने वाली यह सब्जी टेस्ट के साथ सेहत के लिए फायदेमंद है। इसमें शरीर के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व भरे हुए हैं। यह दिल को स्वस्थ रखने और डायबिटीज सहित कई रोगों से बचाने में सहायक होती है।
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