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Maharajganj News: मुन्ना भाई अस्पताल वालों की चांदी, आशा कार्यकर्ताओं के जरिए पहुंचते हैं मरीज

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मुन्ना भाई अस्पताल वालों की चांदी, आशा कार्यकर्ताओं के जरिए पहुंचते हैं मरीज
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लक्ष्मीपुर कस्बे में हुई छापेमारी में अस्पताल के रजिस्टर में आशा कार्यकर्ताओं के नाम मिले दर्ज, हो रही जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। मुन्ना भाई अस्पताल वालों की चांदी है। मरीज माफिया के दम पर इन अस्पतालों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। इस नेटवर्क में अस्पताल संचालक से लेकर आशा कार्यकर्ता तक शामिल हैं। बगैर पंजीकरण वाले निजी अस्पतालों में आशा कार्यकर्ता मरीज भेजकर बदले में रकम लेती हैं। अस्पताल वाले मरीज से मोटी रकम ऐंठकर सभी में कमीशन बांटते हैं। अस्पतालों में मरीजों को भेजने के काले कारनामे की पोल खुली तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सन्न रह गए। यह तभी हुआ जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिकायत के बाद जांच की। इसके पहले स्वास्थ्य विभाग शिथिल पड़ा रहता है।
जानकारी के अनुसार, जिले में बगैर पंजीकरण वाले अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। बृहस्पतिवार को लक्ष्मीपुर कस्बे में दो अस्पतालों की ओटी सील हो गई है। जांच में अस्पताल में एक रजिस्टर मिला, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के नाम मिले। उनके मोबाइल नंबर भी अंकित मिले। एक रजिस्टर तो ऐसा मिला है, जिसपर क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं के नाम लिखे हुए हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों की जांच तेज हो गई है। दो अस्पताल की ओटी सील करने के बाद आशाओं की भूमिका की तलाश की जा रही है। जांच में रजिस्टर पर कुछ आशाओं के नाम मोबाइल नंबर मिले हैं, इसी आधार पर जांच पड़ताल शुरू हो गई है। लक्ष्मीपुर सीएचसी के अधीक्षक को जांच के लिए निर्देशित किया गया है।
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सूत्र बताते हैं कि आपरेशन वाले प्रत्येक केस लाने पर दो से पांच हजार रुपये आशा कार्यकर्ता को दिए जाते हैं। इसी वजह से आशा कार्यकर्ता अस्पताल संचालकों के सॉफ्ट टारगेट होती हैं। इन आशाओं को निजी अस्पताल वाले टारगेट भी देते हैं। माह से 25 से 30 केस देने पर अलग से भी कुछ रकम दी जाती है। समय समय पर उपहार देने की व्यवस्था भी है।

फर्जी अस्पताल संचालक एसीएमओ के आदेश को दिखा रहा ठेंगा
महराजगंज। अवैध रूप से संचालित राजाबारी न्यू मद्धेशिया हास्पिटल संचालक को अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश के बाद भी कोई असर होता नहीं दिख रहा है। किशुनपुर टोला पिपरडाढ़ा निवासी ओमप्रकाश प्रजापति ने स्वास्थ्य विभाग को शिकायती पत्र भेजकर बताया कि पत्नी सुनीता देवी की बच्चेदानी में गांठ की शिकायत थी। राजाबारी, ठूठीबारी न्यू मद्धेशिया हास्पिटल में इलाज कराया। अस्पताल संचालक ने बरगदवां मद्धेशिया हास्पिटल ले जाकर हाई ब्ल्डप्रेशर में ही आपरेशन करा दिया, जिससे पत्नी की तबीयत बिगड़ने लगी और आपरेशन के तीसरे दिन ब्रेन हेमरेज हो गया। पीड़ित ने मामले में कार्रवाई की मांग की।
जिस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी मामले को संज्ञान में लेकर मद्धेशिया हास्पिटल बरगदवां को 24 जून को नोटिस भेजकर आपरेशन एवं उपचार से संबंधी अभिलेख, आपरेशन करने वाले सर्जन का नाम एवं योग्यता संबंधी जानकारी मांगी थी। वहीं इस मामले की जांच की जिम्मेदारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को दी। 4 जुलाई को अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने बरगदवां स्थित विवादित हास्पिटल की शाखा न्यू मद्धेशिया हास्पिटल राजाबारी ठूठीबारी की जांच की तो एक पंजीकरण पर दो हास्पिटल संचालित पाया। जिस पर संचालक को सीएमओ ने अवैध रूप से संचालित न्यू मद्धेशिया हास्पिटल को बंद करने के लिए निर्देश देकर चले गए, लेकिन अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के आदेश का पालन नहीं दिख रहा है।
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सामान्य प्रसव की स्थिति में भी बता दिया जाता है आपरेशन

सरकारी अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहता है। जिला महिला अस्पताल में जैसे ही कोई गर्भवती आती है तो उसको यहां पर सही इलाज न मिलने की बात कहते हुए वह अपने सांठगांठ वाले निजी अस्पतालों में ले जाती हैं। निजी अस्पताल में जाने के बाद सामान्य प्रसव की स्थिति में भी उनको ऑपरेशन के लिए कह दिया जाता है। निजी अस्पतालों से उनको हर प्रसव पर मोटा कमीशन मिल जाता है। इस तरह का खेल काफी समय से यहां चल रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ भी प्रसूताओं को नहीं मिल पाता है।

अस्पताल में मिल जाते अनजान मददगार

जिला अस्पताल हो या सीएचसी की इमरजेंसी में गंभीर मरीज को पहुंचते ही अनजान मददगार मिल जाते हैं। वे स्ट्रेचर खींचने से भर्ती और जांच कराने में मदद करते हैं। कुछ देर बाद ही वे परिजन से मेलजोल बढ़ा लेते हैं। फिर गुमराह करते हैं कि आपके पास पैसे हैं तो रिस्क नहीं लेना चाहिए। यहां बेहतर सुविधा नहीं मिल पाएगी। इसके बाद बातचीत कर निजी अस्पतालों में मरीजों को पहुंचा देते हैं।

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निजी अस्पताल की ओटी सील हुई थी, संचालित हो रहा अस्पताल

अवैध रूप से सिसवा कस्बे में चल रहे एक अस्पताल पर छह जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर को सील कर दिया। मौके से संचालक अस्पताल छोड़ फरार हो गया। अपर सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. ईश्वरचंद्र विद्यासागर व आदित्य पांडेय की संयुक्त टीम ने छापा डाला था। टीम ने वार्ड में ऑपरेशन के बाद भर्ती किए गए मरीजों व कर्मचारियों से पूछताछ की। मौके से चिकित्सक व अस्पताल संचालक नहीं मिले थे। अपूर्ण प्रपत्र को कब्जे में ले लिया गया था। रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रपत्र पूर्ण न होने से ओटी को सील कर दिया गया था। इन दिनों अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहा है।
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जिला अस्पताल में बिचौलिए घूमते रहते

महराजगंज। जिला अस्पताल में बिचौलिए घूमते रहते हैं। डॉक्टरों से सांठगांठ कर दवा लिखवाते हैं। निजी लैब में सैंपल ले जाने के लिए बिचौलिए भी अस्पताल में भ्रमण करते रहते हैं। यही नहीं, जच्चा बच्चा वार्ड से केस निजी अस्पतालों में रेफर कर मोटी कमाई करते हैं। इस सभी मामलों के सामने आने पर कुछ दिन बिचौलिए अपनी गतिविधियां बंद कर देते हैं, लेकिन बाद में फिर शुरू हो जाते हैं। बिचौलियों के इस खेल में मुन्ना भाई अस्पताल वालों की चांदी रहती है। दवा खरीदवा कर कमीशन भी बिचौलिए बनाते हैं। सूत्र बताते हैं कि यह धंधा प्रत्येक दिन चार से पांच लाख रुपये से अधिक का हो चुका है। गोरखपुर तक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का ठेका बिचौलिए लेते हैं।
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शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। प्रपत्रों को पूरा करने के बाद ही अस्पताल संचालित हो सकता है। आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका की जांच कराई जा रही है। लक्ष्मीपुर के अधीक्षक को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। नियम के विपरीत अस्पताल का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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