सिंदुरिया। क्षेत्र के ग्राम सभा पिपरा कल्याण में रविवार को नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। आचार्य अद्या पांडेय ने कहा कि ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का अनूठा संगम श्रीमद्भागवत है। सांसारिक मोह, माया को त्याग कर परमात्मा का स्मरण करना ही वैराग्य होता है। जिसके जीवन में भक्ति नहीं होती उसका जीवन नीरस एवं सारहीन होता है। भगवान की कथा सुनने से भक्ति तृप्त होती है। ज्ञान और वैराग्य ह्रदय में दृढ़ होते हैं और हमारे जीवन में भक्ति बढ़ती है तो भगवान के चरणों में अनुराग और प्रेम होता है। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद ने नारायण से कहा मुझ पर ऐसी कृपा करें कि संसार का कोई भी सुख पाने का विचार भी मेरे मन में न आए। किसी भी प्रकार की इंद्रियों में सुख की कामना न हो। मेरे हृदय में कभी किसी कामना का बीज ही अंकुरित न हो। ऐसा वरदान मुझे दें। भजन करने से जीव भगवान के साथ एक हो जाता है। इसलिए भक्ति को बुढ़ापे के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। बल्कि कम उम्र में ही शुरू कर देना चाहिए। संवाद