डॉक्टरों की कमी, लोगों की सेहत पर पड़ रही भारी
- स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से व्यवस्था चरमराई, नहीं हो पा रहा समुचित इलाज
- 177 चिकित्सक की जगह महज 85 तैनात, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक की भी कमी
महराजगंज। जिले में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से व्यवस्था चरमरा गई है। इससे करीब तीस लाख की आबादी पर असर पड़ रहा है। सीएचसी, पीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने पर वहां से मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा जिला अस्पताल है।
जानकारी के अनुसार सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के अलावा अन्य कर्मियों की कमी है। 177 चिकित्साधिकारी में 92, चतुर्थ श्रेणी के 222 कर्मियों में 85, उपचारिका 50 में 15 की तैनाती है। 80 फार्मासिस्ट की तैनाती है। चीफ फार्मासिस्ट छह की जगह चार तैनात हैं। लैब असिस्टेंट 10 की जगह सात हैं।
लैब टेक्निशियन 28 की जगह 27, 16 एक्सरे टेक्निशियन की तैनाती है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिला 299 की जगह 191, पुरूष 147 की जगह 16, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक महिला 49 की जगह 26, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक पुरूष 88 की जगह 24 हैं।
कर्मियों के कमी की वजह से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। एक सीएचसी के जिम्मे करीब एक लाख की आबादी को सेहतमंद बनाने की जिम्मेदारी है।
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सीएचसी विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं
जिले के सभी सीएचसी पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हैं। विशेषज्ञों को तैनात नहीं रहने से लोगों को इलाज कराने में परेशानी होती है। उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। नियम के अनुसार पर सीएचसी पर सर्जन, फिजिशियन, रेडियोलाजिस्ट, बेहोशी के डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ की तैनाती होनी चाहिए।
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मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी
जिले में चिकित्सकों की कमी की वजह से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। खोन्हौली गांव के पलकधारी भारती ने कहा कि जब अस्पताल में कर्मी ही पूरे तैनात नहीं रहेंगे तो स्वास्थ्य सुविधा बेहतर ढंग से कैसे मिलेगी। सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। जयश्री गांव के रामकिशुन यादव का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं रहने से निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है। समस्या के प्रति जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
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चिकित्सक समेत अन्य स्टॉफ की तैनाती शासन स्तर से होती है। कर्मियों के कमी की सूचना शासन को भेज दी गई है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में लोगों को बेहतर ढंग से स्वास्थ्य सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. आईए अंसारी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी