अड्डा बाजार। गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की जद में आए लोगों के मकान व दुकान तोड़ दिए गए, लेकिन संपतिहा के सात लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। बेघर हुए पीड़ित पैसे के अभाव में किराए का घर भी नहीं ले पा रहे हैं।
रमपत चौरसिया, चेतन प्रकाश सागर, छेदी लाल अग्रहरी, उर्मिला देवी, रंगनाथ पांडे, रामवृक्ष अग्रहरी, नेबूलाल चौरसिया, ओम प्रकाश भारती, जय किशुन वरुण को मकान का मुआवजा नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने एसडीएम, एनएचएआई के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर मकान तोड़ने पहुंचे थे। उनसे आग्रह किया गया कि मुआवजा के पैसे मिलते ही खुद जमीन खाली कर देंगे। कहीं नया ठिकाना बना लिया जाएगा। अधिकारियों ने जल्द पैसे भेजने का आश्वासन दिया और जमीन खाली करने का दबाव बनाकर लौट गए थे। मुआवजा पाने के लिए महराजगंज का चक्कर लगाते एड़ियां घिस गईं। आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
संपतिहा के रमपत चौरसिया ने बताया कि इसी मकान में परिवार रहता है। मजदूरी के सहारे गुजर बसर होता है। तीन लाख 30 हजार मुआवजा मिलना है। मकान तोड़ने में रुपये खर्च करने पड़ेंगे। बगैर धन के मकान कैसे टूट पाएगा। परिवार कहां रहेगा। चेतन प्रकाश सागर ने कहा कि पूरे जीवन की कमाई से छह कमरे का दो मंजिला मकान बनाया था। इसी में परिवार रहता है। छोटी सी हार्डवेयर की दुकान किए थे। ऊहापोह की स्थिति में दुकान बर्बाद हो गई। करीब छह लाख 50 हजार ही मुआवजा मिला है।
अपर जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि मुआवजा दिया जा रहा है। संबंधित पटल पर जरूरी प्रपत्रों को लेकर पहुंचे।