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Maharajganj News: टिकट की कालाबाजारी में सात वर्ष की सजा, सट्टेबाजी में होगी जेल

Mon, 08 Jul 2024 05:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। नए कानून में अपराधों पर अलग-अलग प्रकार की सजा का प्रावधान है। टिकट की कालाबाजारी में सात साल की सजा है। धारा 112 के तहत क्रिकेट मैच या फिल्मों के टिकट की कालाबाजारी करने पर आरोपी को जेल जाना पड़ेगा। इसमें सात साल की सजा का प्रावधान बनाया गया है।
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सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त मंत्री प्रशासन जीपी कन्नौजिया ने बताया कि सट्टेबाजी के अपराध को भी धारा 112 के अंतर्गत जोड़ा गया है। सट्टेबाजी या जुआ खेलते पकड़े जाने पर आरोपी को जेल जाना पड़ेगा, इसमें सात साल की सजा हो सकती है। अभी तक पकड़े जाने के बाद आरोपियों पर छोटी मोटी धारा में केस लगते थे। वे तुरंत छूट जाते थे। इसके साथ ही जेब काटना, चोरी, चेन स्नेचिंग, मोबाइल छीनना और धोखा देकर चोरी करने के अपराध में भी धारा 112 के तहत ही कार्रवाई की जाएगी।
दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता आशीष त्रिपाठी का कहना है कि मॉल या दुकान से बिना भुगतान किए सामान ले गए तो अब जेल जाना पड़ सकता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 में नए अपराध शॉपलिफ्टर को शामिल किया गया है। मॉल, दुकान आदि जगहों पर जान बूझकर भुगतान किए बगैर चोरी से सामान लेकर जाने पर धारा 112 के तहत सात साल की सजा का प्रावधान किया गया है।
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कई बार ऐसा देखा गया है कि दुकान या मॉल से कई खरीदार सामान चोरी कर लेते हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए नए कानून में नियम सख्त किए गए हैं। परीक्षा का पेपर बेचने पर भी कड़ी सजा सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों की बिक्री करने के आरोप में भी धारा 112 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें भी सात साल की सजा का प्रावधान है।


पीड़िता या बच्चे को बयान देने के लिए थाने आने की जरूरत नहीं

महराजगंज। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध को लेकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) अब 18 वर्ष तक के बच्चों को एक श्रेणी में कर दिया गया। अब अलग-अलग नहीं इनके साथ अपराध में एक धारा लगाई जाएगी। नए कानून के तहत मानव तस्करी और नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी को उम्रकैद या मृत्युदंड और जुर्माने का प्रावधान है।

वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि लड़कियों को बेचना या वेश्यावृति कराना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में लाया गया है। वहीं बच्चों से काम कराना, मजदूरी कराना या अपराध में उनका इस्तेमाल करने पर भी आरोपियों को कारावास और अर्थदंड से दंडित करने का प्रावधान है। पुलिस को सूचना के आधार पर तीन दिन के अंदर एफआईआर लिखनी होगी। पीड़िता या बच्चे को बयान देने के लिए थाने आने की जरूरत भी नहीं होगी।
वे जहां चाहेंगे पुलिस वहां जाकर उनका बयान रिकॉर्ड करेगी। दुष्कर्म के मामले में अब केवल 60 दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करनी होगी। 90 दिन के अंदर पीड़िता को केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट के बारे में पुलिस को बताना होगा। दुष्कर्म या अन्य किसी मामले में अगर पीड़िता आगे केस नहीं लड़ना चाहती है तब केवल रजामंदी से काम नहीं चलेगा। फैसला देने से पहले कोर्ट में पीड़िता का बयान अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
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