महराजगंज। जेल प्रशासन की एक सार्थक पहल से कैदियों में अक्षर ज्ञान का उजियारा फैल रहा है। पहले जो कैदी अंगूठा लगाते थे आज वह हस्ताक्षर कर रहे हैं। वहीं हिंदी-अंग्रेजी भी फर्राटेदार पढ़ रहे हैं।
महराजगंज जेल में इस समय 780 कैदी हैं। इसमें 13 विदेशी हैं। इसमें 18 से 21 वर्ष की उम्र वाले 50 बंदी निरुद्ध हैं। 25 बंदियों ने शिक्षा की मुहिम से जुड़कर ज्ञान प्राप्त करने की शुरुआत की है। वह जेल से निकलकर अपराध की जिंदगी से नाता तोड़कर कुछ अलग करने का मन बना चुके हैं। जेल प्रशासन इनका सहयोग कर रहा है। कारागार परिसर में उनके लिए ब्लैकबोर्ड लगवा दिया गया है। साथ ही पढ़ने वाले कैदियों के लिए कॉपी, किताब, कलम और पत्र-पत्रिकाओं का प्रबंध भी किया गया है।
जिला कारागार परिसर में हर दिन सुबह और शाम कैदियों की कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां बाहर से शिक्षक नहीं आते हैं, लेकिन उन कैदियों को निरक्षर कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो डिग्री होल्डर हैं और लंबे अंतराल की सजा भुगत रहे हैं। अलग-अलग दिन अलग-अलग शिक्षक विभिन्न विषयों का न सिर्फ ज्ञान देते हैं, बल्कि कैदियों को होमवर्क भी दिया जाता है।
देश दुनिया की खबरों व सामाजिक मुद्दों को जानने के लिए पढ़ाई करने वाले कैदी समाचारपत्र अथवा पत्रिकाओं में छपी खबर बड़े चाव से सुनते हैं। दो कैदी तो इनमें से ऐसे हैं जो क्लास शुरू होने से पहले समाचारपत्र पढ़कर अन्य को सुनाते हैं। पढ़ने वाले 5 कैदी ऐसे हैं जो पहले अंगूठा लगाते थे, लेकिन अब सुस्पष्ट अक्षरों में अपना हस्ताक्षर कर लेते हैं। जेल प्रशासन भी इनकी तत्परता से खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा है।
25 की संख्या में प्रतिदिन कैदियों की कक्षाएं लगती हैं। अनुभवी कैदी शिक्षा प्रदान करते हैं। पढ़ाई से जुड़ने वाले सभी कैदियों को काॅपी, किताब, कलम मुहैया कराया गया है। उनके लिए पत्र-पत्रिकाएं भी मंगाई जाती हैं। हमारा प्रयास है कि युवा कैदी अपराध की दुनिया से दूर होकर बाहर निकलने के बाद सम्मानित जिंदगी व्यतीत करें।
-प्रभात सिंह, जेल अधीक्षक