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Maharajganj News: गठजोड़ के दम पर चल रहा कई निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों का धंधा

Thu, 22 Jun 2023 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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बिचौलियों के इस खेल में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ के अलावा रकम की भी हो रही बर्बादी
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संवाद न्यूज एजेंसी

महरजगंज। सरकारी अस्पतालों से साठगांठ कर मुन्ना भाई अस्पताल वाले अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। गठजोड़ इतना मजबूत है कि निजी अस्पताल समेत मेडिकल स्टोर संचालक भी मालामाल हो रहे हैं। बिचौलियों के इस खेल में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ के अलावा रकम की बर्बादी भी हो रही है।



शहर समेत जिले के कई बड़े अस्पतालों का काम सरकारी अस्पतालों से मरीज उठा रहे बिचौलिए चला रहे हैं। जिला अस्पताल में दिन रात इन बिचौलियों का डेरा जमा रहता है। यही नहीं निजी मेडिकल स्टोर का दवाई का धंधा भी इसी माफिया और दलालों के जरिये चल रहा है। कुछ डॉक्टरों की शह पर दलाल बेरोक टोक अस्पताल में आ रहे हैं और मरीजों को बरगला कर निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ले जा रहे हैं।
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कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो कमीशन के लिए दलालों के निजी मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। जिला अस्पताल में बिचौलिए इन दिनों घूमते रहते हैं। डॉक्टरों से सेटिंग कर दवा लिखवाते हैं। निजी लैब में सैंपल ले जाने के लिए बिचौलिए अस्पताल में भ्रमण करते रहते हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि दादी और बुआ कोड वर्ड है। यही जच्चा बच्चा वार्ड से केस निजी अस्पतालों में रेफर कर मोटी कमाई करते हैं। मामलों के सामने आने पर कुछ दिन बिचौलिए ठंडे रहते हैं, लेकिन बाद शुरू हो जाते हैं। बिचौलियों के इस खेल में मुन्ना भाई अस्पताल वालों की चांदी रहती है। दवा खरीदवा कर कमीशन भी बिचौलिए बनाते हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक दिन चार से पांच लाख रुपये से अधिक का यह कारोबार हो चुका है। गोरखपुर तक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का ठेका बिचौलिए लेते हैं।

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सीसीटीवी कैमरे कोई मतलब नहीं

जिला अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा लगा है, लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया था सीसीटीवी कैमरे की मदद से बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है। हालत यह है कि सीसीटीवी कैमरे में अस्पताल प्रशासन को कुछ दिखता ही नहीं है। दिन भर बिचौलिए अस्पताल में भ्रमण करते रहते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि हमेशा राउंड लिया जाता है। बिचौलियों काे अस्पताल परिसर से बाहर कर दिया गया है।

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तीन साल पहले सीज भी हो चुका है हॉस्पिटल

बरगदवा क्षेत्र के जिस निजी हॉस्पिटल में महिला की लापरवाही पूर्वक ऑपरेशन करने का आरोप लगा है, वह हॉस्पिटल तीन साल पहले सीज हो चुका है। नौ जनवरी 2020 को सीएमओ को शिकायत मिली थी कि बरगदवा एसएसबी मार्ग के पश्चिम एक मकान में संचालित निजी हॉस्पिटल में एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, फिर भी वहां मरीजों का ऑपरेशन किया जा रहा है। तत्कालीन सीएमओ के निर्देश पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी ने जांच की। उस दौरान अस्पताल में मरीज भरे थे, लेकिन कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। ऑपरेशन थियेटर भी खुला था, जहां एक मरीज के ऑपरेशन की तैयारी चल रही थी। अस्पताल का पंजीकरण भी एक्सपायर मिला था। बोर्ड पर जिन डॉक्टरों का नाम लिखा गया था, हॉस्पिटल में वह मौजूद नहीं मिले। फर्जी डॉक्टर बनकर संचालक मरीजों का इलाज कर रहा था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हाॅस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर को सीज कर दिया था।

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एक ही पंजीकरण नंबर पर बरगदवा व ठूठीबारी में निजी हॉस्पिटल संचालित

हैरत वाली बात यह है कि बरगदवा क्षेत्र के जिस निजी हॉस्पिटल पर महिला के ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगा है, उसके रजिस्ट्रेशन नंबर पर ठूठीबारी में भी निजी हॉस्पिटल है। दोनों के नाम में केवल न्यू शब्द जोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि तीन साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने जब आरोपित हॉस्पिटल को सीज किया था, तब संचालक ने स्वास्थ्य विभाग की साठगांठ से उसी नाम से जगह बदल कर एक हॉस्पिटल बरगदवा और दूसरा ठूठीबारी में खोल दिया। नाम में केवल न्यू शब्द का अंतर है। यह नए मरीजों को बुलाने का कलेक्शन प्वाइंट है। जहां से मरीजों को बहला फुसलाकर इलाज के लिए बरगदवा भेज दिया जाता है। सीएमओ डॉ. नीना वर्मा का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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ब्लड प्रेशर हाई होने के बाद भी कर दिया आॅपरेशन

महराजगंज। ठूठीबारी क्षेत्र के किशुनपुर टोला पिपरडाढ़ा निवासी ओमप्रकाश प्रजापति ने स्वास्थ्य विभाग को शिकायती पत्र देकर बताया है कि उसकी पत्नी सुनीता देवी की बच्चेदानी में गांठ की शिकायत थी। 29 मई को वह पत्नी का इलाज कराने बरगदवा क्षेत्र के आरोपित निजी हॉस्पिटल ले गया। जहां डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी। जांच में ब्लड प्रेशर हाई होने के बाद परिजनों ने ऑपरेशन कराने से मना कर दिया, लेकिन डॉक्टर ने रुपयों के लालच में ऑपरेशन कर दिया। महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल संचालक ने गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में उसकी पत्नी कोमा में चली गई। संवाद

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नियम के अनुसार संचालित नहीं होने वाले अस्पतालों पर समय-समय पर जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। अभियान चलाकर अस्पतालों की जांच की जाएगी।

-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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