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Maharajganj News: 212.16 लाख रुपये खर्च, नहीं शुरू हो सकी पानी की आपूर्ति

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बॉर्डर तक जाने वाली मुख्य सड़क निर्माण के चलते कई जगह पाइप क्षतिग्रस्त हो चुकी



संवाद न्यूज एजेंसी



निचलौल। भारत नेपाल बॉर्डर के सीमा से सटे गांव शितलापुर खेसरहा और रेंगहिया में लोगों को प्यास बुझाने के लिए ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 212.16 लाख रुपये खर्च कर दिया गया। टैंक निर्माण के छह वर्ष बाद भी यहां के लोगों की प्यास नहीं बुझी। हालांकि ग्रामीण इसकी शिकायत विभाग के जिम्मेदारों से कई बार कर चुके हैं। लेकिन विभाग के जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।



विभाग के जिम्मेदारों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत नेपाल बॉर्डर की सीमा से सटे गांव शितलापुर खेसरहा और रेंगहिया के करीब आधा दर्ज टोले में बसे करीब 7 हजार लोगों की प्यास बुझाने शितलापुर खेसरहा गांव के दक्षिण तरफ ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत मार्च 2017 में 212.16 लाख रुपये खर्च कर वाटर हेड टैंक का निर्माण कराया गया। जिसकी उच्च जलाशय क्षमता 350 किली है। जबकि स्टेजिंग 18 मीटर है। वही वितरण प्रणाली 14.91 किमी है।
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तलापुर ग्रामीण पिंटू पासवान, वीरेंद्र यादव, नंदलाल, महेंद्र पाल, इंतयाज आदि ने कहा कि गांव में वाटर हेड टैंक का निर्माण कार्य पूरा हुआ। उम्मीद जगी की अब उन लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा। लेकिन विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते निर्माण के छह वर्ष बीत जाने के बाद भी वाटर हेडटैंक से उन लोगों का प्यास नहीं बुझ सका। इतना ही इन लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग के जिम्मेदार वाटर हेड टैंक के साथ ही दो भवनों का भी निर्माण कार्य कराया है। एक भवन के दीवार पर स्टार्टर एव मोटर पंप मिस्त्री इमरान गोरखपुर के साथ मोबाइल नंबर लिखा गया है। जबकि दूसरे भवन के दीवार पर जलापूर्ति का समय बताया गया है कि गर्मियों में सुबह 5 से 8,दोपहर में 12 से 2 और साय 5 से 8 बजे तक जबकि सर्दियों में सुबह 6 से 9,दोपहर में 12 से 2 और साय 4 से 7 बजे तक जलापूर्ति की जाएगी। हालांकि जलापूर्ति के लिए यहां पर कोई भी जिम्मेदार मौजूद नहीं है। ऐसे में आज तक आपूर्ति नहीं हो सकी। इस मामले में जिम्मेदारों से कई बार शिकायत भी की गई। लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हुआ।
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जलनिगम अधिशासी अभियंता अतीक हुसैन ने कहा कि मामले की जानकारी है। बॉर्डर तक जाने वाली मुख्य सड़क निर्माण के चलते कई जगह पाइप क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बजट की मांग की गई है। रकम मिलने के बाद ठीक कराकर जलापूर्ति की जाएगी।

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