वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को जिले के 40 हजार उद्यमियों के अरमानों को पंख लगाते हुए करीब एक हजार करोड़ के ऋण वितरित किए। इसमें तराई के चावल व महराजगंज के फर्नीचर उद्योग को बढ़ाने देने के लिए बैंकों ने अपना खजाना खोल दिया। वित्त मंत्री भी यहां के चावल के जायके का उल्लेख कर उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने का संकेत दे गईं।
भारत-नेपाल की सीमा से लगने वाले महराजगंज जनपद में उद्योग के नाम पर चीनी व राइस मिलें ही थीं। इनमें से एक सिसवा चीनी मिल को छोड़ सभी बंद पड़ी हैं। चीनी उद्योग के बंद होने के बाद जिले में उद्योग के नाम पर बस राइस मिलें ही बची हैं, जिसे आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री की पहल पर बैंकों ने अपना खजाना खोला है। करीब 100 करोड़ रुपये राइस मिलरों को ऋण दिए गए हैं, जिससे जिले में राइस मिलों की संख्या बढ़ेगी। इससे रोजगार के मौके बढ़ने के साथ तराई के चावल का स्वाद देश के अन्य राज्यों और जिले तक भी पहुंचेगा।
मंच से इनको मिला ऋण प्रमाण पत्र
-मनोज कुमार यादवफास्टफूड के लिए
-वीरेंद्र जायसवाल-फास्टफूड
-जयहिंद-पीएम स्वनिधि योजना
-पूजा यादव-ब्यूटी पार्लर
-रमेश प्रसाद-फर्नीचर के लिए
-उमेश सिंह-नमकीन उद्योग
-शालिनी गुप्ता-राइस मिल के लिए
-नीलू पाठक-मोबाइल रिपेयरिंग के लिए
-कन्हैया-आटा चक्की के लिए
महराजगंज मेडिकल कॉलेज के लिए मिला 400 करोड़
जनपद में पीपीपी मोड पर बने मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन विनय श्रीवास्तव ने वित्त मंत्री को पुष्प गुच्छ व बुद्ध प्रतिमा देकर आभार व्यक्त किया। वित्त मंत्री ने 400 करोड़ रुपये लोन का प्रमाण पत्र मंच से चेयरमैन विनय श्रीवास्तव को सौंपा। उन्होंने जनपद महराजगंज को मेडिकल कॉलेज के लिए राज्य सरकार द्वारा 80 करोड़ अनुदान देने पर आभार व्यक्त किया। इस योजना में बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने पहल करते हुए 184 करोड़ रुपये का ऋण मेडिकल काॅलेज को देकर जनपद के विकास में विशेष योगदान दिया। मुख्य वित्त प्रबंधक सीए पवन शर्मा ने भी आभार प्रकट किया।