करीब ढाई टन लाल चंदन की लकड़ी की बरामदगी से बाॅर्डर क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। लंबे समय बाद इस क्षेत्र में लाल चंदन की लकड़ी बरामद हुई है। हालांकि इस मामले में पुलिस या कस्टम विभाग किसी को पकड़ पाने में नाकाम रहे। सूत्रों के अनुसार, लाल चंदन की लकड़ी की तस्करी में मोटा लाभ है। तस्कर आंध्र प्रदेश से लकड़ी को ट्रकों में दूसरे सामानों के बीच छिपाकर लाते हैं और भारत से नेपाल भेजे जाने वाले चिकित्सकीय उपकरणों और विभिन्न वाहनों के कल पुर्जों के बीच में रखकर आराम से नेपाल पहुंचा देते हैं। इसके बाद नेपाली गाड़ियों से नारायण घाट, मुग्लिंग, गोरखा होते हुए तिब्बत के रास्ते चीन पहुंचा दिया जाता है, जहां इसकी बेहद मांग रहती है।
डिप्टी कमिश्नर कस्टम नौतनवा वैभव कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात में एक ट्रक और गोदाम से ढाई करोड़ रुपये कीमत की ढाई टन लाल चंदन की लकड़ी बरामद हुई है। इस बरामदगी के बाद कस्टम ने सिक्रयत बढ़ा दी है।
खाली ट्रक नेपाल जाने पर हुआ था शक
सोनौली बॉर्डर पर कस्टम विभाग की टीम सूचना के बाद जांच कर रही थी। तभी एक नेपाली नंबर का ट्रक आता दिखा। ट्रक रुकवाया गया तो वह खाली था। खाली ट्रक नेपाल जाने को लेकर कस्टम टीम को कुछ शक हुआ तो उसने काफी गहराई से जांच की। तब ट्रक की कैविटी में छिपा कर रखी करीब डेढ़ टन लाल चंदन की लकड़ी बरामद हुई। टीम में अधीक्षक एसके पटेल, डीके अस्थाना, केएन मिश्रा, विवेक सिंह, सीतेस यादव, कुमार गौतम और अजय कुमार शामिल रहे। इस दौरान मौका पाकर ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर भाग निकला। ट्रक को कब्जे में लेकर नौतनवा कार्यालय लाया गया। इसके बाद एक गोदाम पर छापेमारी कर एक टन लाल चंदन की लकड़ी बरामद की गई।
खाली गाड़ी लेकर जाने वाले वाहन हो रहे चिह्नित
खाली गाड़ी में लाल चंदन की लकड़ी बरामद होने के बाद सरहद की सुरक्षा एजेंसियां नेपाल से खाली गाड़ी लेकर आने और वापस खाली गाड़ी लेकर जाने वाले वाहनों को चिह्नित कर रही हैं। सोनाली सीमा पर करीब एक दर्जन ऐसे बंद ट्रक हैं, जो प्रतिदिन गाड़ी लेकर नौतनवा तक जाते हैं। वापस खाली गाड़ी लेकर लौट जाते हैं।
छोटी-छोटी खेप में बॉर्डर पार होती है लाल चंदन
सूत्रों की माने तो चंदन की लकड़ी को छोटी-छोटी खेप में नेपाल पहुंचाने का खेल चल रहा है। इसे वाहनों से सोनौली के गोदाम में डंप किया जा रहा है। यहां से नेपाली नंबर के बड़े ट्रकों में लोड कर बॉर्डर पार कराकर काठमांडो पहुंचाया जाता है। चीन में लाल चंदन की डिमांड बहुत अधिक है। चीन पहुंचते ही इसकी कीमत कई गुना हो जाती है। चीन में लाल चंदन की लकड़ी से कई सजावटी सामान बनाए जाते हैं। अन्य कामों में भी इस्तेमाल होता है। इसीलिए चीन में लाल चंदन की लकड़ी की डिमांड अधिक रहती है।
आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं लाल चंदन के पेड़
पहले विभिन्न स्थानों पर वन उत्पादों की जांच के लिए विभाग ने बैरियर भी बनाए थे, लेकिन अब इसके सक्रिय न होने से तस्कर चांदी काट रहे हैं। जानकार बताते हैं कि लाल चंदन के पेड़ आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं। यहां की शेषाचलम पहाड़ियों पर मिलने वाले लाल चंदन के पेड़ 11 मीटर तक लंबे होते हैं। तमिलनाडु सीमा से सटे चित्तूर, कड़प्पा, नेल्लार व कुरनूल जिलों में यह पाए जाते हैं। भारतीय बाजार में रक्त चंदन 10-15 हजार रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 30-35 हजार रुपये प्रति किलो है। इस कार्रवाई से एक बार फिर रक्त चंदन की तस्करी सुर्खियों में है। भारत-नेपाल सीमा पर बैठे अंतरराष्ट्रीय तस्कर रक्त चंदन को चीन पहुंचाकर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।
नेपाल में अगस्त महीने में भी पकड़ी गई थी लाल चंदन की लकड़ी
सीमा से सटे नेपाल के नवलपरासी जिले में बीते रविवार को करीब 150 किलोग्राम लाल चंदन की बरामदगी हुई थी। हिरासत में लिए गए आरोपी ने पूछताछ में बताया था कि लाल चंदन को भारत के ठूठीबारी सीमा के रास्ते नेपाल के रामग्राम लाया गया था। इसे चीन भेजे जाने की योजना थी।