महराजगंज। जिले में 148 गांवों की रियल टाइम खतौनी अपडेट नहीं है। इसके चलते किसान केसीसी का ई-केवाईसी भी नहीं करा पा रहे हैं। इससे खतौनी से जुड़े अन्य काम भी रुक गए हैं। इससे लोग इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट रियल टाइम खतौनी में तकनीकि खामियां आने से दाखिल खारिज की प्रक्रिया उलझकर रह गई है। यही नहीं यूनीकोड जनरेट न होने से इसमें वक्त लग रहा है।
जिले में 1262 गांवों में रियल टाइम खतौनी अपडेट की जानी थी। इसमें से 148 गांवों की अभी अपडेट नहीं हो सकी है। पोर्टल में जब कोई परेशानी आती है तो इसे बोर्ड को अवगत कराने के बाद समस्या दूर कराया जाता है। जानकारों के मुताबिक जिन खतौनियों में अंश निर्धारण नहीं हो पाता उनमें यूनीकोड जेनरेट नहीं हो रहा है। तकनीकि खामी के कारण समस्या होती है। अगर एक व्यक्ति का बही खाता है तो उसकी खतौनी भी उसी हिसाब से होगी। अपडेट करने के दौरान साइट पर दबाव अधिक होने के कारण समस्या होती है। अंश निर्धारण में परेशानी होती है। शुरुआत से ही अब तक कई तरह की समस्याएं इसमें आ रही हैं। खतौनी गलत बनने के बाद लॉक होने पर भी समस्या आती है।
नई खतौनी की नकल लेने पर राजस्व की भी हो रही बढ़ोतरी
शासन स्तर से रीयल टाइम खतौनी की प्रक्रिया जमीन के विवाद को कम करने के उद्देश्य से अपनाई गई है। पहले एक ही खाता संख्या की खतौनी में कई गाटा नंबर होता था और काश्तकार भी अधिक होते थे। इससे खतौनी से काश्तकार का अंश पता नहीं चल पाता था। इसकी वजह से लोग गुमराह होते रहे। इसीलिए तय हुआ कि अब प्रत्येक गाटे की अलग खतौनी होगी और उससे संबंधित खातेदार का उसमें अंश निर्धारण भी अंकित होगा। इस नई खतौनी की नकल लेने पर राजस्व की बढ़ोत्तरी भी हो रही है।