महराजगंज। समय से पहले काम पूरे नहीं हुए। बारिश शुरू होने से काम प्रभावित हो रहे हैं। रोहिन वियर बैराज से लेकर पुल निर्माण भी अधर में है। बारिश के चलते ऑडिटोरियम का निर्माण भी शुरू नहीं हो सका। लेआउट बनाने तक ही काम सिमट कर रह गया। बघेला नाले पर पुल का आधा छत लग चुका है, शेष हिस्सा अधूरा है। बारिश होने के कारण काम में अवरोध हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में रोहिन वियर का निर्माण भी गति नहीं पकड़ रहा है। नदी में पानी आ गया है। काम करने के दौरान बहुत सावधानी बरतनी पड़ रही है। अवर अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि मौसम के हिसाब से काम कराया जा रहा है। बारिश के कारण समस्या हो रही है। इसी तरह से बकुलडिहा का पुल निर्माण भी शुरू नहीं हो सका। ऑडिटोरियम का निर्माण भी शुरू नहीं हो सका।
डिजिटल बैराज के निचले के हिस्से का काम पूरा, ऊपर अधूरा
नौतनवा तहसील क्षेत्र के रतनपुर के मिश्रौलियां में रोहिन नदी पर बन रहा डिजिटल बैराज का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में नदी में पानी आ गया है। बारिश की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। बैराज के ऊपरी हिस्से में काम हो रहा है। लगभग ज्यादातर काम हो चुके हैं। वर्ष 1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में वियर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी आपूर्ति की जाती थी।
अगस्त 2005 में आई भीषण बाढ़ से रोहिन वियर गेट टूट गया, जिससे नहरों में पानी आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से नदी में अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति की जाने लगी, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था। वर्ष 2018 में योगी की सरकार बनी तो रोहिन नदी पर ऑटोमेटिक बैराज बनाने की स्वीकृति दी और वर्ष 2020 से 148 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है।
गड्ढा खोदकर काम आगे बढ़ाए तो होने लगी बारिश
वर्ष 2021 की बाढ़ में बकुलडिहा गांव के लाला टोला में बना पुल ध्वस्त हो गया था। इसके निर्माण के लिए तेजी सिर्फ फाइलों में दिख रही है। बरसात से पहले काम पूरा कराने का दावा किया गया था, लेकिन मिट्टी खोदकर छोड़ दिया गया। अभी काम पूरा नहीं हुआ है। गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। बारिश के कारण काम नहीं हो पा रहा है।
बरसात अधिक हो गई तो छह से अधिक गांवों और उनके कई टोलों में बसी करीब 30 हजार की आबादी को परेशानी होगी। क्षेत्र के धर्मेंद्र, दुर्विजय, अनिल, ऋषिराज ने बताया कि गांव से सटकर नेपाल राष्ट्र के पहाड़ों से निकली चंदन नदी गुजरी है। यह नदी हर वर्ष बरसात में बाढ़ लेकर लाती है। मुख्य मार्ग का ध्वस्त पुल अभी नहीं बना है। ऐसे में सुकरहडर, बकुलडिहा, बसहा टोला, लाला टोला, नदी टोला, सिहाभार, बसौली, जिगनिहवा, कजडहवा, मल्लाह टोला, अहिरन टोला के करीब 30 हजार लोगों को ठूठीबारी जाने के लिए डवलिया होते हुए 18 किमी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
आधे हिस्से का छत लगा, आधा अधूरा
नौतनवा ब्लाॅक क्षेत्र के ग्राम पंचायत लुठहवा व ग्राम पंचायत गंगवलिया के बीच बघेला नाला पर दो करोड़ 29 लाख की लागत से पुल बन रहा है। बारिश की वजह से काम तेज नहीं हो रहा है। पुल का छत लगाना है, लेकिन मौसम की बेरूखी से मजदूरों को काम करने में परेशानी हो रही है। पुल के आधे छत की ढलाई हो चुकी है। पुल नहीं बनने से क्षेत्र के लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता राहुल प्रसाद जिज्ञासु ने बताया कि बरसात होने से काम प्रभावित हो रहा है।
काम शुरू होने के पहले परिसर में जलभराव
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीछे चिह्नित स्थान पर अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनेगा। इसकी वित्तीय स्वीकृति शासन से फरवरी में ही मिल गई थी। अत्याधुनिक ऑडिटोरियम की कुल लागत 15.22 करोड़ है। बनने के पहले ही बरसात शुरू हो गई, इस वजह से काम शुरू नहीं हो सका है। बरसात का मौसम का समाप्त होने के बाद काम शुरू होगा। प्रथम किस्त के रूप में 2.67 करोड़ की राशि मिल चुकी है। ऑडिटोरियम का क्षेत्रफल भूमितल पर 1950 वर्ग मीटर है। इसमें मुख्य मंच, मुख्य हाल और कुल 480 कुर्सियां लगाई जाएंगी। आधुनिक पार्किंग का भी निर्माण किया जाएगा। जबकि प्रथम तल पर 380 वर्ग मीटर में वीआईपी सूट का निर्माण किया जाएगा।