जिला अस्पताल में इलाज कराती महिला।
महराजगंज। जिले के सरकारी अस्पतालों में डाॅक्टरों की कमी होने के करण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। करीब 34 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में केवल जिला अस्पताल में ही दो हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। सीएचसी स्तर पर न तो रोडियोलाजिस्ट हैं और न ही गाइनेकोलाजिस्ट व अर्थोसर्जन। ऐसे में गंभीर रोगियों को निजी अस्पतालों में महंगे दाम पर इलाज कराना पड़ रहा है।
जिले में कुल 189 नियमित डाक्टर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसमें से महज 72 डॉक्टरों की तैनाती है। सभी सीएचसी पर रेडियोलाजिस्ट, अर्थोसर्जन, गाइनेकोलाजिस्ट की जगह है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो रेडियोलाॅजिस्ट हैं और न ही अर्थो सर्जन तैनात है। वहीं परतावल सीएचसी पर एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। फरेंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्त्री रोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल से अटैच कर दिया गया है। ऐसे में सीएचसी स्तर पर महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। केवलापुर के रहने वाले अंगद चौहान ने कहा कि अगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वीकृत पद के सापेक्ष डाॅक्टरों की तैनाती होती तो मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज नहीं कराना पड़ता। बागापार के दीपक जायसवाल ने कहा कि विशेषज्ञ डाॅक्टरों के न होने से मरीजों को परेशानी होती है। अगर नजदीक में ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले तो मरीजों का धन व समय दोनो बचेगा।
सीएचसी स्तर पर डाक्टरों की कमी है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। जो संसाधन है उसमें बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. राकेश कुमार, एसीएमओ