बागापार। सदर तहसील क्षेत्र के बागापार में सात माह पूर्व मत्स्य पालन के लिए पोखरी की नीलामी में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पोखरी की नीलामी में बोलीदाता ने तथ्यों को छिपाते हुए सर्वोच्च बोली लगाकर पट्टा अपने नाम करा लिया। गांव के एक व्यक्ति की शिकायत पर एसडीएम सदर ने गड़बड़ी मिलने पर पोखरी की नीलामी को निरस्त कर दिया है। साथ ही प्रथम किस्त के रूप में जमा रुपयों को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करते हुए पुनः पोखरी की नीलामी करने का निर्देश दिया है।
मामला सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा बागापार का है। पोखरी संख्या 2873 क्षेत्रफल 0.417 हे. की 20 सितंबर 2024 को नीलामी कराई गई थी। नीलामी में गांव के ही फूलचंद ने 8 लाख 24 हजार रुपये सर्वोच्च बोली लगाकर पोखरी का 10 वर्षों के लिए पट्टा प्राप्त कर लिया। प्रथम किस्त के रुप में 82 हजार 400 रुपये जमा भी कर दिए। इसी बीच बागापार निवासी जितेंद्र निषाद ने 10 अक्तूबर को जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि बोलीदाता फूलचंद ने पूर्व में पोखरी गाटा संख्या 2873ख रकवा 0.417 हे. की नीलामी में भाग लेकर 21 अक्तूबर 2002 में 10 वर्षों के लिए 30.900 रुपये में प्राप्त किया था। बोलीदाता द्वारा नीलाम की गई शर्तों के अनुसार धनराशि जमा नहीं किया गया।
मामले की जांच में यह तथ्य निकलकर आया कि बोलीदाता पूर्व का बकाएदार है। तथ्य छिपाकर पोखरी की नीलामी प्रतिभाग किया। एडीएम ने बोली के समय जमा नीलामी धनराशि का प्रथम किस्त 82400 रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जब्त भी कर लिया है। एसडीएम रमेश कुमार ने बताया कि तथ्य छिपाकर पोखरी की नीलामी में सर्वोच्च बोलीदाता के नीलामी को अस्वीकृत किया गया है। तहसीलदार सदर को निर्देश दिया गया है कि उक्त पोखरी का पुनः नीलामी की तिथि सुनिश्चित कर नियमानुसार नीलामी कराएं।