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Maharajganj News: दिवाली, छठ में पटाखों के शोर से लोगों के सुनने की क्षमता प्रभावित

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बस स्टेशन पर बस में चढ़ने के लिए खड़े यात्री।संवाद
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-70 डेसिबल से अधिक अचानक तेज आवाज से सडन ईयरिंग लास से लोग पीड़ित हुए
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- चार से पांच मरीज प्रत्येक दिन पहुंच रहे जिला अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दिवाली और छठ में पटाखों के शोर से लोगों के सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है। जिला अस्पताल में ईएनटी सर्जन के कक्ष में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पटाखों की तेज आवाज का असर लोगों के कानाें पर पड़ा है। प्रत्येक दिन चार से पांच मरीज इस समस्या से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इनमें माइल्ड ईयरिंग लास मिला है।
दिवाली पर शहर से लेकर गांव तक पटाखा जमकर फोड़े गए। पटाखे के तेज आवाज का दुष्प्रभाव कुछ लोगों के सुनने की क्षमता पर पड़ा है। 70 डेसिबल से अधिक अचानक तेज आवाज से सडन ईयरिंग लास से लोग पीड़ित हुए हैं। जिला अस्पताल के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ के पास इस समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। चार दिन के अंदर 20 से अधिक लोग इलाज कराने पहुंचे हैं। इसमें कुछ लोगों को कान में दर्द, सनसनाहट की दिक्कत थी, जबकि चार लोग कान से अचानक कम सुनाई देने की समस्या से पीड़ित थे।
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सोमवार को सतीश व रमेश कम सुनाई की शिकायत लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने दवा दी और एक सप्ताह बाद बुलाया। आराम न मिलने पर प्योर टोन ऑडियोमेट्री जांच कराने की सलाह दी।
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तेज आवाज होती है परेशानी
-कान, सिर दर्द, चक्कर आना

-कान में सनसनाहट की होना
-कान की नस सूखने व पर्दा फटना


पटाखे की तेज आवाज से सुनाई कम देने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। तेज आवाज कान के लिए नुकसानदायक होता है। नसें सूखने लगती हैं। माइल्ड ईयरिंग लास के मरीज अधिक आए हैं। दवा के साथ जरूरत पड़ने पर जांच भी कराई जा रही है। पटाखा की तेज आवाज से अचानक सुनाई देना बंद हो जाता है। वहीं कान की नस सूख सकती है और पर्दे में छेद हो सकता है, जबकि दर्द, सनसनाहट की समस्या उत्पन्न होती है। 90 डेसिबल से अधिक पर सुनाई कम देता है।
-डॉ. अनिरूद्ध कुमार, नाक कान गला रोग विशेषज्ञ

बस स्टेशन पर बस में चढ़ने के लिए खड़े यात्री।संवाद

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