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Maharajganj News: फर्नीचर कारोबार को एक जिला एक उत्पाद ने दी संजीवनी

Tue, 20 Aug 2024 04:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। एक जिला एक उत्पाद ने फर्नीचर कारोबार को संजीवनी दी है। एक जिला एक उत्पाद में चयनित होने के बाद यह कारोबार जिले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुजरे वक्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। वर्ष 2018 से अब तक नौ करोड़ तक फर्नीचर कारोबार पहुंच गया।
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जानकारी के अनुसार, तेजी से बढ़ रहे फर्नीचर कारोबार में कारीगरों को काम मिलने के साथ उचित प्रोत्साहन मिल रहा है। फर्नीचर कारोबारियों को बेशकीमती लकड़ियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इस कारोबार में 5,000 से अधिक लोगों को काम मिला है। वन संपदा के मामले में महराजगंज जनपद धनी है। जिले में कुशल कारीगर हैं।
मजबूत व टिकाऊ फर्नीचर बनाया जाता है। यहां के फर्नीचरों की मांग देश में बड़े महानगरों में है। ग्रामोद्योग कार्यालय में हर साल 10 से 12 बेरोजगार युवकों को काष्ठ कला व्यवसाय के लिए ऋण दिया जा जाता है। एक जिला, एक उत्पाद का शुभारंभ 2018-19 में हुआ। योजना के तहत वर्तमान में 1,050 को टूल किट मिला है। इससे कामगारों को काम करने में समस्या दूर हुई।
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उपायुक्त उद्यम अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि जिले में फर्नीचर कारोबार को आगे बढ़ाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। सरकार की योजनाओं के माध्यम से पात्रों को लाभ दिया जा रहा है।


ये हैं फर्नीचर के बड़े कारोबारी

जिले में फर्नीचर कारोबारी अमरनाथ यादव बभनौली का उद्याेग 50 लाख, बौलिया में रामगोपाल को 50 लाख का ऋण मिला है। गुडविल फर्नीचर उद्योग को 25 लाख का ऋण मिला है। खान फर्नीचर की एक करोड़ ऋण लेने की फाइल बैंक में है। योजना के तहत कारोबार को आगे बढ़ाने में उचित प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महराजगंज जिले की पहचान फर्नीचर कारोबार से है। इससे तमाम परिवारों का गुजर-बसर हो रहा है। नक्काशी वाले फर्नीचरों की मांग ज्यादा रहती है।



सेवानिवृत्त सैनिक गौरीशंकर ने फर्नीचर उद्योग में पहचान बनाई

निचलौल ब्लॉक के खाेन्हौली गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त सैनिक गौरीशंकर गुप्ता ने फर्नीचर उद्योग में पहचान बनाई है। शुरुआत में उन्होंने हिम्मत जुटाई। पूंजी लगाई और जिले में फर्नीचर कारोबार शुरू किया। उनका फर्नीचर केवल जिले में ही नहीं अन्य प्रदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौरीशंकर 2003 में सेवानिवृत्त हुए तो लुधियाना में व्यवसाय करने चले गए। कई शहरों को देखा और सुना लेकिन वहां मन नहीं लगा। उन्हें अन्य प्रदेशों में फर्नीचर की किल्लत दिखी। 2013 में महराजगंज आए तो फर्नीचर को उद्योग बना लिया। दो साल बाद गोरखपुर रोड पर बैकुंठपुर में अपने निजी मकान में शोरूम खोल लिया। गोरखपुर, पडरौना, डुमरियागंज में भी शोरूम खोल लिया।

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यहां फर्नीचर के कुशल कारीगर हैं

महराजगंज जिले में लगभग 342 वर्ग किमी क्षेत्र वन से घिरा हुआ है। यह पूरे जिले के लगभग 11.59 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है। यह जिला वन से घिरा होने के कारण विभिन्न फर्नीचर के उत्पाद के लिए उपयुक्त है। कारण यह कि यहां मुख्य तौर पर साल के पेड़ मौजूद हैं। यह विभिन्न प्रकार के फर्नीचर उत्पादों जैसे कि कुर्सी, दरवाजा, बिस्तर, सोफा, मेज इत्यादि के उत्पाद में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री है। यहां फर्नीचर के कुशल कारीगर हैं।
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