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Maharajganj News: ऑनकाल व्यवस्था से अवैध अस्पतालों का जाल मजबूत

Mon, 08 Apr 2024 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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जिले में 81 पंजीकृत, तीन गुना अवैध अस्पताल हो रहे संचालित नवीनीकरण में बढ़ेगी मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार एक डॉक्टर एक जगह पर प्रैक्टिस करेंगे। ऐसे में इस नियम का सख्ती से पालन हुआ तो ज्यादातर अस्पताल बंद हो जाएंगे। जिले में 81 पंजीकृत, जबकि तीन गुना अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।
जिले के करीब 200 अस्पतालों में आने वाले दिनों में समस्या शुरू हो जाएगी। इनमें से अधिकांश वह अस्पताल हैं, जिनका संचालन कोई डॉक्टर ही नहीं बल्कि दूसरे लोग कर रहे हैं। अप्रैल में अस्पतालों की मान्यता का नवीनीकरण शुरू हो गया है, ऐसे में एक डॉक्टर का एक ही अस्पताल में पंजीकरण मान्य होगा। ऐसी स्थिति में दूसरे अस्पतालों के डॉक्टरों के भरोसे चल रहे अस्पताल बंद करने पड़ेंगे।
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जिले में क्लीनिक, पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंग होम मिलाकर करीब 350 संचालित हैं। इनमें लगभग 200 डॉक्टर कार्यरत हैं। लगभग 300 अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन गैर चिकित्सक करते हैं। वहां अपनी क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर ऑन कॉल प्रैक्टिस करते हैं। इस ऑनकाल व्यवस्था ने ही अवैध अस्पतालों का जाल मजबूत कर दिया। सूत्रों ने बताया कि तमाम ऐसे अस्पताल हैं जो पंजीकरण के समय किसी डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल करते हैं। कुछ दिन वह डॉक्टर एक या दो घंटे के लिए ओपीडी में बैठ जाते हैं। बाद में वह अस्पताल डॉक्टर के बजाय झोला छाप संचालित करने लगते हैं। किसी बड़े अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोग ही ऐसे अस्पतालों में डॉक्टर बन जाते हैं।
गंभीर मरीजों के इलाज से लेकर ऑपरेशन तक करने लगते हैं। बीते दिनों छापा डालने के दौरान टीम को इन बातों की जानकारी हुई थी। कई जगहों पर कागजात हीं नहीं दिखा सके तो अस्पताल व पैथोलाॅजी बंद करने की चेतावनी देकर पंजीकरण कराने के लिए निर्देशित किया गया था। इन सब मामलों के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की, जिसमें यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि एक डॉक्टर का ही एक अस्पताल में पंजीकरण मान्य होगा।
अगर उनके नाम पर पंजीकरण हो रहा है तो उन्हें इस बात का शपथ पत्र देना होगा कि वे उस अस्पताल में एक साल तक प्रैक्टिस करेंगे। जांच में अगर दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों के प्रैक्टिस को बात सामने आई तो मान्यता निरस्त होगी। अस्पताल प्रबंधन उसी डॉक्टर का बोर्ड लगा सकेंगे, जिसके नाम पर उस अस्पताल का पंजीकरण होगा। इन नए नियमों ने अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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वैध अस्पतालों पर रोक लगाने के लिए ही नियमों में सख्ती
अभी जो गाइड लाइन है उसके अनुसार अस्पतालों के पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए विभागीय पोर्टल पर 30 अप्रैल तक आवेदन करना है। इसके बाद एक मई से आवेदन पत्रों के सत्यापन के बाद पंजीकरण या नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया करीब 20 मई तक चलेगी। जिले में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 81 अस्पताल हैं, जिनका नवीनीकरण होना है। इन दिनों 10-12 आवेदन आ रहे हैं। अवैध अस्पतालों पर रोक लगाने के लिए ही नियमों में सख्ती की गई है। इस नियम का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। मरीजों को बेहतर ढंग से इलाज की सुविधा मिलने, इसके लिए सख्ती बरती जा रही है।
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जिले में अवैध अस्पताल व पैथालॉजी समेत अल्ट्रासाउंड सेंटराें की जांच समय समय पर की जाती है। बीते दिनों जांच की गई थी। बगैर पंजीकरण अस्पताल व पैथोलॉजी को बंद करा दिया गया था। पंजीकरण के लिए आवेदन आ रहे हैं। रिनिवल की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। नियमों की सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
डॉ. राजेश द्विवेदी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी
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