महराजगंज। जिले में अनफिट स्कूल वाहनों पर अधिकारियों की नजर नहीं है। स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के बाद थी बेहतर सुविधाएं नहीं दे रहे हैं। इसमें परिवहन व्यवस्था प्रमुख है। स्कूलों के ज्यादातर वाहन अनफिट हैं। इन्हीं वाहनों से मासूमों को लाते और ले जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग की नजर भी इस पर नहीं है। किराए पर बस रखने वाले स्कूल संचालक हादसा होने पर बस मालिक पर ठीकरा फोड़ देते हैं। एआरटीओ कार्यालय में 392 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें कुछ बसें हैं तो ज्यादातर मैजिक हैं। इनमें 30 वाहनों को अनफिट माना गया है। संभागीय निरीक्षक आरडी प्रसाद ने बताया कि संबंधित स्कूल संचालकों को चेतावनी दी है कि फिटनेस जल्द करा लें। जांच के दौरान अनफिट वाहन चलते पाए जाने पर वाहन को सीज कर दिया जाएगा। साथ ही चालक और मालिक को नोटिस जारी कर जवाब तलब होगा। अगर कोई हादसा होगा तो संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी।
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स्कूल बस के लिए मानक
स्कूल बस की प्रत्येक वर्ष फिटनेस जरूरी है
बीस साल बाद बस को कंडम घोषित कर दिया जाता है
बस निर्माण के बीस साल बाद न तो परमिट जारी होता है, न ही फिटनेस दिया जाता है
स्कूल बस की वैद्य आयु 20 वर्ष होती है
स्कूल बस या किसी भी बड़ी बस व ट्रक का परमिट पांच साल के लिए दिया जाता है