महराजगंज। नेपाली कॉस्मेटिक ही नहीं टूथपेस्ट भी कानपुर मंडी पहुंच रहा है। मोटा मुनाफा के चक्कर में कैरियरों के जरिए इसे मंगाया जा रहा है। बीते दिनों हुई बरामदगी में यह बातें सामने आई थीं। एक जैसे सामानों पर एक ही कंपनी के मेड इन नेपाल होने से ग्राहक इसे समझ नहीं पाते और बाजार में आसानी से खप जा रहा है।
सूत्रों की माने तो बॉर्डर एरिया में कॉस्मेटिक सामान काठमांडो, हितोंडा और भैरहवा से लाया जा रहा है। इसमें नेपाली मूल की महिलाएं सीमावर्ती इलाकों में लाकर फुटकर में सामान बेच रही हैं। शुक्रवार को सुरक्षा कर्मियों ने एक नेपाली महिला को गिरफ्तार किया था। जब बरामदगी होती है तब मामले का खुलासा होता है। नेपाली रेट पर खरीदकर इंडियन दामों पर बेचकर तस्कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
सीमावर्ती गांव और नगर इन दिनों कास्मेटिक के तस्करी के सामानों का हब बन चुका है। नेपाल से सोनौली के रास्ते रोजाना करोड़ों रुपये के काॅस्मेटिक प्रॉडक्ट तस्करी कर गोरखपुर, कानपुर सहित देश के अन्य इलाकों में खपाए जा रहे हैं। इन प्रॉडक्ट में टूथपेस्ट से लेकर शैंपू, साबुन, मसाला, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के तमाम ब्रांड की क्रीम आदि शामिल हैं।
हैरानी वाली बात तो यह है कि इन सामानों में नकली से लेकर असली भी शामिल हैं, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इन सामानों को नेपाल के रेट पर खरीदकर यहां इंडियन दामों में बेचा जा रहा है। रोजाना इस तस्करी के कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों से लेकर सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है।
होता है दोगुना का मुनाफा
इन सामानों में कुछ काॅस्मेटिक प्रॉडेक्ट तो नकली हैं। जिनपर मेड इन चाइना भी लिखा होता है, लेकिन अधिकांश सामान असली और नेपाली ब्रांडेड ही हैं। इस पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। बावजूद इसके इसपर अंकुश लगने की बजाए तस्करी का धंधा बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि जिस टूथ पेस्ट की कीमत नेपाल में 54 रुपये है, इंडिया में उसकी कीमत करीब 90 रुपये है। यही सामान होलसेल में लेने में इसकी कीमत 50 से घटकर करीब 45 रुपये हो जाती है। जबकि भारतीय बाजार के होलसेल मार्केट में भी इस टूथपेस्ट की कीमत करीब 80 रुपये है।
बेहद मुश्किल है पहचान पाना
कास्मेटिक सामानों को यहां के मार्केट में आसानी से खपाने की एक सबसे बड़ी खास वजह यह भी है कि इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। क्योंकि यह सामान देखने में बिलकुल उसी तरह हैं, जैसा कि भारत में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके सामानों की पैकिंग के पीछे काफी ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि यह प्रॉडक्ट मेड इन नेपाल के हैं। भारतीय ब्रांडेड कंपनियाें की नेपाल में भी फैक्ट्री है। मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर कंपनी का पता भी नेपाल का है। यह प्रॉडक्ट सिर्फ नेपाल में ही बेचे जा सकते हैं। नेपाल में इसकी एमआरपी बेहद कम है और भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत और भी अधिक कम हो जाती है, इसका फायदा उठाते हुए तस्कर रोजाना करोड़ों का माल बाॅर्डर से आसानी से पार करा रहे हैं।
तस्करी रोकने के लिए पुलिस अलर्ट है। सूचना मिलने की त्वरित कार्रवाई की जाती है।
-आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक