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एनओसी का रोड़ा : आखिर कैसे मिले रामग्राम को पहचान

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एनओसी का रोड़ा : आ​खिर कैसे मिले रामग्राम को पहचान
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जिला प्रशासन ने वन विभाग को जल्दी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए दिया निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। पुरातत्व विभाग की अनुमति के बाद भी रामग्राम का उत्खनन नहीं हो रहा है, इसमें वन विभाग ने एनओसी नहीं दी है। इस वजह से बुद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने वाले रामग्राम को पहचान मिलने की राह में रोड़ा अटक गया है। जिला प्रशासन की ओर से वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि जल्दी से प्रक्रिया पूरी कराए।
पूरी दुनिया में सत्य और अहिंसा का संदेश देने वाले भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े रामग्राम स्तूप को सजाने, संवारने और पर्यटन स्थल बनाने पहल रंग नहीं ला रही है। माना जाता है कि मुख्य टीला जिसमे भगवान बुद्ध का आठवां अस्थि कलश है, उसी पर एक विशाल काय वृक्ष है। इसी का उत्खनन होना है। लेकिन एनओसी नहीं मिलने के कारण रामग्राम स्तूप उत्खनन नहीं हो पा रहा है। रामग्राम स्तूप को लेकर कई प्रमाण मिल चुके हैं। इतिहासकार भी एकमत दिखाई देते हैं, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हो पाने से रामग्राम का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व छिपा रह गया है। खनन होने के बाद इस स्थान का महत्व बढ़ जाएगा। सरकार की ओर से बौद्ध पर्यटन स्थल रामग्राम में 827 लाख रुपये की लागत से पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए रकम जारी कर दी गई है। योजना के तहत यहां पर गेस्ट हाउस, हाल, लैंड स्केपिंग, घाट निर्माण तथा सोलर लाइट लगाने का काम किया जाएगा।
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विभाग ने इसकी कार्य योजना तैयार कर ली है। लेकिन, वन विभाग की लेटलतीफी इसमें रोड़ा अटका रही है। वन विभाग की ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर फाइल उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। वहां अनुमति मिलने के बाद एनओसी जारी कर दी जाएगी। वन विभाग के अधिकारी अभी इसमें थोड़ा वक्त लगने की बात बता रहे हैं। वर्तमान में रामग्राम टीले तक पहुंचना आसान नहीं है। राम ग्राम जाने के लिए चौक बाजार से सोनाड़ी खास होते हुए सुंदरपुर पहुंचा तो, यहां मुन्ना चौधरी से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि विकास की दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद पिछड़ा है। मुख्य मार्ग ठीक हैं लेकिन आगे की सड़क ठीक नहीं है। सुंदरपुर से नहर की पश्चिम पटरी पकड़कर करीब एक किलोमीटर आगे जाने पर पिच बाएं मुड़ा मिला। करीब सौ मीटर आगे जाने पर पुराना शिव मंदिर दिखा। मंदिर के उत्तर बगल से जंगल के भीतर कच्ची सड़क पर कीचड़ से होकर जाना पडा।
करीब एक किलोमीटर अंदर जाने के बाद ऊंचे ऊंचे मिट्टी के टीले दिखे। छोटे बड़े मिलाकर सात टीले हैं। माना जाता है कि मुख्य टीला जिसमे भगवान बुद्ध का आठवां अस्थि कलश है, उसी पर एक विशाल काय वृक्ष मिला। टीले से सटे उत्तर और दक्षिण- पश्चिम में दो तालाब हैं। रामग्राम में मिले रामचंद्र ने बताया कि खनन होता को क्षेत्र को एक नई पहचान मिलती। सरकार तो विकास की बात सोच रही है, लेकिन अधिकारी गंभीर नहीं हैं।


सड़क चौड़ीकरण में खर्च होंगे 23 करोड़
लोक निर्माण विभाग चौक से रामग्राम तक की सात किलोमीटर सड़क को सात मीटर चौड़ा करेगा। इस पर 23 करोड़ 50 लाख खर्च होंगे। चौक से रामग्राम मार्ग का चौड़ीकरण होने से सुंदरपुर, सोनाड़ी खास, धरमौली, नाथनगर, झुंगवा, परासखाड़, कम्हरिया कला, बेलभरिया, सधोचक, करौता, रुदलापुर, पिपरा सोनाड़ी, सोहगौरा समेत करीब दो दर्जन गांव के लगभग चालीस हजार लोगों को फायदा होगा।


बुद्ध की अस्थियों का सबसे बड़ा हिस्सा रामग्राम में माना जाता

महराजगंज। बुद्ध की अस्थियों का सबसे बड़ा हिस्सा रामग्राम में माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, भगवान के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त करने के बाद उनके अनुयायी राजा वहां पहुंच गए। बुद्ध की अस्थियों को अपने साथ ले जाने की बात पर उनके बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान किसी ने सुझाया कि अस्थियों को आठ हिस्सों में बांट कर हर किसी को एक-एक हिस्सा सौंप दिया जाए। अस्थियों के आठवें हिस्से को कोलिय वंश के राजा महाकाल अपने साथ ले आए और रामग्राम में उसके ऊपर धातु स्तूप का निर्माण कराया। कुषाण व गुप्त कालखंड में इसे विस्तृत आकार दिया गया।
बाद में बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद सम्राट अशोक ने बुद्ध की अस्थियों के सात हिस्सों को निकलवाकर सैकड़ों हिस्सों में बांटा और देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजवाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया। कहा जाता है कि सम्राट अशोक अस्थियों के लिए रामग्राम भी पहुंचा था, लेकिन यहां जंगली जानवरों को अस्थि स्तूप की परिक्रमा करते देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया और अस्थियों का कुछ हिस्सा यहां से निकलवाने का विचार त्याग दिया। ऐसे में रामग्राम स्तूप ही वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियों के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है।

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सड़क बनेगी तो आने वाले दिनों में समस्या नहीं होगी। वर्तमान में अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो चौक बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

रामचंद्र, वनटांगिया


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विकास के दावे व हकीकत में अंतर दिख रहा है। अधिकारी समस्याओं पर गंभीर नहीं हैं। बरसात में घर तक पहुंचना में बहुत परेशानी होती है।



बलिराम, वनटांगिया





रामग्राम को पहचान मिलने के बाद क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी। पर्यटकों का आना जाना बढ़ेगा। इस दिशा में तेजी लाने की जरूरत है।

विमल पांडेय, महासचिव सिटीजन फोरम





बौद्ध स्थलों के विकास के लिए प्रभावी प्रयास की जरूरत है। रामग्राम में उत्खनन होने के बाद क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी। पर्यटन समेत रोजगार के अवसर मिलेंगे।



जितेंद्र राव, अध्यक्ष, देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति

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रामग्राम के विकास के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव कोशिश की जा रही है। समस्याओं का समाधान कराने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। आने वाले दिनों में जरूरी प्रकिया पूरी कराने के बाद कार्रवाई शुरू कराई जाएगी।
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सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी



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सड़क बनाने के लिए मिले 21 करोड़, एनओसी का इंतजार
वन ग्राम 24 नर्सरी जाने के लिए जंगल के अंदर की बदहाल सड़क है। सरकार ने 21 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। इस रकम से वन ग्रामों को जाने वाली सड़क बनेगी। वन विभाग एनओसी देगा तो कार्य शुरू होगा। चौक से वनग्राम बलुअहिया जाने के लिए करीब दस किलोमीटर जंगल में कच्ची मार्ग से होकर जाना पड़ता है। बरसात होते ही पानी और कीचड़ से भर जाता है। साइकिल भी कंधे पर रखकर ले जाना पड़ता है। मलाव नाले पर पहले लकड़ी का पुल था जो अभी क्षतिग्रस्त है। उसके आगे जाने लायक रास्ता नहीं है।
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