महराजगंज। निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के टिकुलहिया गांव में मनरेगा योजना में मुर्दे से मजदूरी कराने और उसके बैंक खाते में मजदूरी की रकम भुगतान करने का मामला प्रकाश में आया था। अमर उजाला में 10 मई को ''गजब... यहां तो मुर्दे भी मनरेगा में काम करते हैं और मजदूरी लेते हैं'' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। जिम्मेदारों ने अपना गला फंसते देख आनन-फानन में जांच कमेटी गठित कर दी। जांच में मामला सही मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच कमेटी के सदस्यों ने 17 मई को उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी सौंप दी, इसके बाद भी जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने में जुट गए हैं।
जांच कमेटी के सदस्य सहायक खंड विकास अधिकारी विनय पांडेय ने बताया की टिकुलहिया गांव में मृत लल्लन से 2020-21 में गांव के मुख्तार के घर से निचलौल शहर के सिवान तक चकरोड के उच्चीकरण कार्य पर मस्टरोल संख्या 3693 पर 16 दिन मजदूरी करते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं 3216 रुपये भी लल्लन के खाते में भुगतान भी किया गया है। इसी तरह 2020-21 में ही गांव स्थित बाग की मेड़बंदी कार्य पर मस्टरोल संख्या 14090 पर 14 दिन मजदूरी कराकर खाते में 2814 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि वर्ष 2022-23 में हरगांवा सिवान से टोंगरी पुल तक नाली खुदाई कार्य पर मस्टरोल संख्या 332 पर 14 दिन मजदूरी करते हुए दिखाकर 2982 रुपये का खाते में भुगतान किया गया है। जांच कमेटी ने लिखा है कि जिम्मेदार मृतक से मजदूरी कराकर खाते में रकम भेजने के दोषी पाए गए हैं। जिम्मेदार 20 दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न कर मामले को दबाने में जुट गए हैं।