महराजगंज। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों की स्थिति सुधारने की पहल पर जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ रही है। जिले के 91 मॉडल सामुदायिक शौचालयों का कायाकल्प कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए सभी एडीओ पंचायत और संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल कायाकल्प कार्य शुरू कराएं और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले के 882 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इनमें पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी, ताकि ग्रामीणों को खुले में शौच से मुक्ति मिले और गांवों में स्वच्छता बनी रहे, लेकिन समय के साथ अधिकांश शौचालयों की स्थिति जर्जर हो चुकी है। कई जगहों पर दरवाजे टूट गए हैं, पानी की आपूर्ति बंद है, और सफाई की व्यवस्था ठप है। इस समस्या को देखते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी ने सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ पंचायत) को निर्देशित किया था कि वे सभी ग्राम पंचायतों के सचिवों से जर्जर शौचालयों की स्थिति की रिपोर्ट प्राप्त करें। जांच के बाद 177 सामुदायिक शौचालयों को चयनित किया गया, जिन्हें मॉडल सामुदायिक शौचालय’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई और शासन से आवश्यक बजट भी स्वीकृत हुआ। बजट मिलने के बाद चयनित ग्राम पंचायतों में मरम्मत और कायाकल्प का कार्य प्रारंभ किया गया। डीपीआरओ के अनुसार, वर्तमान में 57 गांवों में सामुदायिक शौचालयों के मरम्मत कार्य शुरू हो चुके हैं, वहीं 23 ग्राम पंचायतों में कार्य पूरा कर शौचालयों को मॉडल रूप में विकसित किया जा चुका है। इन गांवों के शौचालयों में टाइल्स, पानी की समुचित व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, शेड और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है।