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Maharajganj News: नाम ट्रामा सेंटर, गंभीर मरीज कर दिए जाते हैं रेफर

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नाम ट्रामा सेंटर, गंभीर मरीज कर दिए जाते हैं रेफर
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पांच माह पहले इमरजेंसी को ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर जिम्मेदारों ने दायित्व की इतिश्री कर दी, चार से पांच केस प्रत्येक दिन रेफर होते गोरखपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। पांच माह पहले इमरजेंसी को ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर जिम्मेदारों ने दायित्व की इतिश्री कर ली। आज भी गंभीर रूप से घायलों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। यहां ट्रामा सेंटर जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक दिन चार-पांच केस गोरखपुर मेडिकल काॅलेज रेफर होते हैं। पहले की तरह इमरजेंसी में इलाज की सुविधा लोगों को मिलती है। भवन का नाम सिर्फ ट्रामा सेंटर किया गया है, जबकि सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है।
जिले की आबादी करीब 30 लाख है। इतनी बड़ी आबादी को सुविधा देने के लिए ट्रामा सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहां जरूरी संसाधन नहीं हैं। इसके लिए कोई कारगर प्रयास नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को ट्रामा सेंटर में बाहर बरामदे में भर्ती मरीज के पास तीमारदार बैठे दिखे। ट्रामा सेंटर पर अलग-अलग कक्ष बनाए गए हैं, लेकिन जिस जरूरत के लिए कक्ष बने हैं, उनमें आवश्यक सामान नहीं है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जितने कर्मी पहले तैनात थे, वही यहां भी सेवा देते हुए दिखे।
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फार्मासिस्ट व डॉक्टर अपने कक्ष में बैठकर जरूरी काम निपटा रहे थे। प्रशिक्षु नर्स व फार्मासिस्ट भी अलग-अलग कमरों में काम कर करते हुए मिले। सभी कक्षों में बीमार व घायल मरीजों को भर्ती किया गया था। बाहर आने पर स्ट्रेचर पर एक महिला लेटी हुई नजर आई। उसकी बहू साथ में थी। एंबुलेंस का इंतजार कर रही थी। करीब घंटे भर बाद एंबुलेंस आई तो महिला बीमार को लेकर गई। एक माह में करीब 100 से अधिक केस गोरखपुर मेडिकल काॅलेज रेफर किया जाता है।

ट्रामा सेंटर में इन सुविधाओं का होना जरूरी
- ट्रामा सेंटर में सर्जन, एनस्थेटिक, आर्थोपेडिक, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ आदि डाक्टरों की तैनाती होनी चहिए। विशेषज्ञ भी नहीं हैं। ताकि दो शिफ्टों में ट्रामा सेंटर चलाया जा सके। स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय, फार्मासिस्ट आदि हैं। इसके अलावा ट्रामा सेंटर आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण से सुसज्जित होते हैं। इसमें वेंटिलेटर, कलर एक्सरे, डिजिटल अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और आईसीयू की भी व्यवस्था चाहिए। ताकि मरीजों को पूरी इलाज की व्यवस्था यहीं पर मिल जाए, उन्हें रेफर करने की जरूरत न पड़े।
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क्या है ट्रामा सेंटर
ट्रामा सेंटर एक ऐसा वार्ड होता है, जहां घायल मरीजों को व्यापक आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जाती है। बस, ट्रक, कार, जीप, मोटर साइकिल आदि वाहन दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिससे वह बहुत गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। शरीर में और भी कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं। इन घायलों के लिए ट्रामा सेंटर बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराता है।
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बेहतर सुविधा नहीं मिलने से झेलनी पड़ती दुश्वारियां

-ट्रामा सेंटर में पूरी सुविधा रहती तो लोगों को दिक्कत नहीं होती। शहर के छत्रपति साहू जी महराज नगर के दिनेश कहते हैं कि करीब 10 दिन एक मित्र की दुर्घटना हुई। उसे जिला अस्पताल में ले जाया गया। ट्रामा सेंटर में उसका इलाज कराया गया, लेकिन बेहतर सुविधा नहीं होने के कारण गोरखपुर रेफर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि समय रहते बीआरडी पहुंचने पर दोस्त की जान बच गई। सुविधा यहीं मिल गई होती तो जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

अस्पताल में जो सुविधा उपलब्ध थी, उसी में बेहतर ढंग से इलाज कराने का प्रयास जारी है। अतिरिक्त कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। भवन हैंडओवर मिलने के बाद उसी में सेवा संचालित कर दी गई। वैसे जिला अस्पताल में सिटी स्कैन, हड्डी रोग विशेषज्ञ समेत अन्य डॉक्टर हैं, उनकी मदद से इलाज होता है। बहुत गंभीर होने पर केस रेफर किया जाता है।
डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

फोटो
सिर्फ भवन बदला है। व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं है। यही कारण है कि गंभीर रूप से घायलों को आज भी गोरखपुर मेडिकल कालेज ही जाना पड़ता। ट्रामा सेंटर में पूरी व्यवस्था कराने के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
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चंद्रशेखर जायसवाल, आजाद नगर
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पहले की तरह से ही इमरजेंसी में इलाज हो रहा है। उसका नाम सिर्फ इन दिनों बदल गया है। लोग समझ रहे हैं कि ट्रामा सेंटर संचालित है, लेकिन असल में तो इमरजेंसी की सुविधा ही मिल रही है।
दशरथ गुप्ता, आजाद नगर
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