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Maharajganj News: ड्राइंग फाॅर न्यू रोहिन वीयर नाम देकर किया था गड़बड़झाला

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शासन को 229 लाख की हुई क्षति, जांच में जानकारी होने पर हुई कार्रवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सिंचाई विभाग अपने कारनामों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। रोहिन वीयर निर्माण में 229 लाख का नुकसान शासन को हुआ है। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर केस दर्ज कराया गया है। ड्राइंग का शीर्षक ड्राइंग फाॅर न्यू रोहिन वीयर देकर गड़बड़झाला कर दिया गया। सेवानिवृत होने के बाद अभियंताओं के कारस्तानी की पोल खुली तो विभाग में खलबली मच गई है।
जानकारी के अनुसार, जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के मिलने पर यह कार्रवाई हुई है। 22 अक्तूबर 2007 को स्थल पर रोहिन वीयर निर्माण की परियोजना लागत को बढ़ा दिया गया था। स्वीकृत ड्राइंग में वीयर के स्थान पर बैराज का निर्माण का प्रावधान किया गया है। ड्राइंग का शीर्षक ड्राइंग फाॅर न्यू रोहिन वीयर दिया गया, लेकिन ड्राइंग के कंपोनेंट बैराज के हैं। ड्राइंग के आधार पर वीयर का निर्माण शुरू कराया गया। इनके द्वारा शासन से स्वीकृत परियोजना एवं स्वीकृत प्राक्कलन विपरीत कार्य कराकर सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन किया गया। जिससे शासन को 229 लाख की क्षति हुई। मुख्य अभियंता (गंडक) के पद पर कार्य करते हुए बटुकेश्वर प्रताप सिंह द्वारा रोहिन वीयर के स्थान पर बैराज की ड्राइंग स्वीकृति में अनियमितताएं की गईं।
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मूलभूत आंकड़ों का संकलन, विश्लेषण आईएस कोड के अनुसार आवश्यक था। उनके संकलन, परीक्षण एवं विश्लेषण के बिना ही इनके द्वारा कार्य कराया गया। नदी के डिस्चार्ज से संबंधित आंकड़ों का पूर्णरूप से गहन अध्ययन नहीं किया गया। वीयर के स्थान पर बैराज के प्रस्तावित स्थल का विस्तृत अध्ययन नहीं किया गया। त्रुटिपूर्ण परिकल्पना के आधार ड्राइंग स्वीकृत कर शासन को 229 लाख की क्षति पहुंचाई गई।

तकनीकी परीक्षण किए बगैर 14 मार्च 2008 को स्वीकृत किया

रोहिन वीयर के स्थान पर बैराज की डिजाइनकर्ता एजेंसी एएचइसीआईआईटी रुड़की द्वारा परिकल्पना के बाद ड्राइंग 10 मार्च 2008 को जारी की गई। इसे तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया। इन्होंने डिजाइनकर्ता एजेंसी से हाइड्रोलिक व स्ट्रक्चरल डिजाइन की गणनाएं प्राप्त नहीं की और न ही उपलब्ध कराई गई। ड्राइंग का विधिवत तकनीकी परीक्षण किए बगैर 14 मार्च 2008 को स्वीकृत किया गया। इस कार्य की हाइड्रोलिक व स्ट्रक्चरल डिजाइन को 23 अक्तूबर 2008 को एएचइसीआई. आईआईटी रूड़की द्वारा तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम, महराजगंज को मांगने पर उपलब्ध कराई गई।
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अनुमोदन के पूर्व डिजाइन चेक नहीं किया गया

शीट पाइल का लेवल 90.90 मीटर आकलित है, लेकिन ड्राइंग में शीट पाइल लगाने का प्रावधान 91.50 मीटर पर रखा गया है। इससे यह प्रमाणित होता है कि इनके द्वारा ड्राइंग अनुमोदन के पूर्व डिजाइन चेक नहीं किया गया। इस प्रकार इनकी ओर से संबंधित आईएस कोड के प्रावधानों के अनुसार डिजाइन का अवलोकन व परीक्षण किये बगैर ड्राइंग स्वीकृत करने एवं त्रुटिपूर्ण डिजाइन के आधार पर कार्य कराया गया। जिससे शासन को 229 लाख की क्षति हुई।
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सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध भी नदी में नहीं कराया

मुख्य अभियंता (गंडक) के पद पर रहते हुए केडी शुक्ला ने रोहिन वीयर का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। उक्त वीयर के निर्माण के लिए खंड में शीट पाइल एक जून 2008 को मिली। कार्य कराने की निर्धारित अवधि 15 जून के पूर्व कराए गए कार्य व अवशेष कार्य की समीक्षा कर निर्माणाधीन संरचना को नदी की बाढ़ से सुरक्षा के लिए कोई निर्देश नहीं दिये गए। अपूर्ण कार्य की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध भी नदी में नहीं कराया गया।
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