महराजगंज। आईटीएम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी पांच अप्रैल से वन ग्रामों का भ्रमण करेंगे। लोगों की दैनिक जीवनचर्या करीब से देखेंगे और विभिन्न रोगों की समस्या उत्पन्न होने पर क्या करना चाहिए इसके बारे में जानकारी देंगे। साथ ही कौन सी दवा का सेवन किस रोग के होने पर करें इसकी भी जानकारी देंगे। साथ ही औषधीय पौधों का महत्व बताकर उसे घर के आसपास रोपित करने के लिए भी जागरूक करेंगे।
आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के इस अभियान में नव्या इंडिया फाउंडेशन भी मदद कर रही है। संस्था की अध्यक्ष आदित्य कृष्ण ने बताया कि आयुर्वेद में औषधीय पौधों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। तुलसी का पौधा ज्वर, पित्त, कफ और वात नाशक माना जाता है। विभिन्न समस्या होने पर इसकी पत्तियां और बीजों का उपयोग भी किया जाता है। आंवला रुधिर शोधन तो नीम की पत्तियां कृमि नाशक के रूप में जानी जाती हैं।
आयुर्वेद शिक्षा के दो बुनियादी मॉडल हैं। एक संस्थागत मॉडल, जो वर्तमान प्रचलन में है और गुरुकुल मॉडल, जो पुराना हो चुका है। गुरुकुल मॉडल सदियों से अस्तित्व में रहा। गुरुकुलम जिसमें कई शिक्षक संस्थागत मॉडल, प्यूरिटन (अष्टवैद्य द्वारा प्रतिपादित शुद्ध शास्त्र) वर्तमान प्रगति के साथ शास्त्र शामिल है। एक संस्थागत मॉडल की आवश्यकता को प्रसिद्ध उद्यमी वैद्यरत्नम पीएस वारियर ने प्रस्तुत किया था। वन ग्राम के भ्रमण में विद्यार्थी वनवासियों की दिनचर्या से रूबरू होंगे और उन्हें रोगों के उपचार के बारे में औषधियों के सेवन की भी जानकारी प्रदान करेंगे। घाव आदि होने पर शरीर के विभिन्न हिस्सों की देखभाल कैसे करें इसके विषय में भी जागरूक करेंगे। कार्यक्रम में स्नेहा, आकाश, अनामिका, सूरज जो बीएएमएस के विद्यार्थी हैं वह अभियान में अपनी टोलियों का नेतृत्व करेंगे।