10 बरस में बदल गई पूरे शहर की सूरत... लंबे समय बाद घर लौटने वाले पहचान ही नहीं पाते
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। अपना महाराजगंज बदल रहा है। 10 साल पहले के महराजगंज और अब में बहुत बदलाव हो गया है। गुजरे वक्त में जहां एकल सड़कें हुआ करती थीं, वहीं अब चौड़ी सड़क व मॉल दिख रहे हैं। जरा सोचिए, आठ-दस साल पहले तक इस शहर की सूरत कैसी थी। खराब सड़कें और हर तरफ जाम, लेकिन आज चौड़ी सड़कें, ऊंची इमारतें, मॉल- कांप्लेक्स...। फर्राटे से वाहन दौड़ते हैं, और शहर के चौराहे भी सुंदर और आकर्षक हो गए हैं। विस्तार लेते शहर में लंबे समय बाद लौटने वाले अपने घर जाने वाले चौड़े रास्तों को पहचान भी नहीं पाते हैं।
शायद इसीलिए हर किसी की जुबान पर एक ही बात सुनाई देने लगी है... महराजगंज बदल रहा है। यहां दिल्ली-एनसीआर का अक्स झलकने लगा है। विदेशों में ही नहीं दिल्ली-नोएडा और दूर-दराज रहने वाले महराजगंज वासी भी पल-पल अपनों से पूछते हैं... और क्या-क्या बदल रहा है।
कुछ ऐसे ही विकास के पथ पर शहर बढ़ रहा है। फरेंदा रोड की सुंदरता अब लोगों को बरबस आकर्षित करती है। पुराने शहरवासी तो जानते ही हैं कि कभी यह सड़क एकल थी, अक्सर जाम के कारण चलना दूभर था। सड़कें पतली थीं और वाहन स्टैंड होने से लंबा जाम लगता था।
अब यहां सड़कें फोरलेन हैं, और चौराहे भी विकसित हो गए हैं। सोमवार सुबह 11 बजे बस स्टेशन के पास काम चल रहा था। यहां अंदर निर्माण हो रहा है। काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि तेजी से काम हो रहा है। स्टेशन की रंगाई-पुताई बाहर से हो चुकी है। अंदर जरूरी काम किया जा रहा है। अगले साल तक यह आकर्षक बस स्टेशन बन कर तैयार होगा। चहारदीवारी के आगे फूल-पत्ती लगेगी।
स्टेशन के आगे बढ़ने पर ज्ञानेंद्र नाथ द्विवेदी की दवा की दुकान मिली। उन्होंने बताया कि सड़क अब चौड़ी होगी। फोरलेन बनने के बाद यह क्षेत्र भी बदला नजर आएगा। इस रोड के बनने से नेपाल बाॅर्डर ठूठीबारी तक पहुंचना आसान होगा। आगे बढ़ने पर राकेश तिवारी मिले। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले स्टेशन की तस्वीर और वर्तमान में बहुत अंतर है। शहर में अब जाम की समस्या नहीं रहती है। कभी कभार स्टेशन के पास सड़क के किनारे बस खड़ी रहने से समस्या होती है।
चौड़ा हो गया सक्सेना चौराहा, नहीं लगता है जाम
शहर में बलिया नाला या फरेंदा रोड जाना हो तो सड़क चौड़ी मिलेगी। पहले यह सड़क भी एकल हुआ करती थी। करीब 10 साल पहले तक इस सड़क पर बहुत जाम लगता था, लेकिन आज फर्राटा से लोग आते-जाते हैं। यहां से कलक्ट्रेट जाने वाले लोग आसानी से पहुंच जाते हैं। शहर होकर फरेंदा तक चौड़ा हाईवे बन चुका है। इससे लोगों को आवागमन में पहले से ज्यादा सहूलियत मिल रही है। फरेंदा से गुजरने पर मेट्रो सिटी का अहसास होने लगता है। इस रोड पर होटल, मॉल, बहुमंजिली इमारतें बनी हैं। इससे दिनभर चहल-पहल बनी रहती है। कई नामी गिरामी कंपनियों के शोरूम खुल गए हैं।
पहले सकरी थी सड़क, एक कमरे में थी पुलिस चौकी
करीब दस साल पहले एक कमरे में पुलिस चौकी संचालित थी। अब यहां की तस्वीर बदल गई है। कमरे बनने के साथ ही सामने जगह भी है। बरामदा भी है। चौराहे पर सड़क के बेहद करीब तक दुकानें थीं। यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम लग जाता था। शहर में होटल और रेस्टोरेंट की संख्या भी बढ़ रही है।
-
जिला पंचायत कार्यालय के सामने पार्क की दीवार पर बनी खूबसूरत पेंटिंग भी आने-जाने वाले लोगों को खूब लुभाती है। फरेंदा रोड पर महुअवा चौराहे तक डिवाइडर पर गमलों में लगे पौधे आकर्षित करते हैं। रात में रंग बिरंगी झालरों की रोशनी से शहर की भव्यता नजर आने लगती है। इससे यहां से गुजरने वालों का ध्यान बरबस ही खिंच जाता है। हम लोगों ने कभी कल्पना नहीं की थी कि शहर इतना बदल जाएगा।
-विनय कुमार श्रीवास्तव, सचिव नगर सहकारी बैंक
मैंने तो लंबा समय इस शहर में बिताया है। सड़कें पतली थीं, तो हर तरफ जाम लगता था। कुछ ही प्रतिष्ठानों के शोरूम थे, और गिने चुने होटल, लेकिन आज जिस रूट पर निकल जाइए, सब कुछ उपलब्ध है। यह सब बदलाव सात से आठ वर्ष में हुआ है।
-अवनीश नारायण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता
-
इस शहर में अब परिवार के साथ घूमने के लिए कई जगहें हैं। वाकई यह शहर अब बड़े शहरों की तरह दिख रहा है। मुझे लगता है कि अगर कोई बहुत दिनों बाद आएगा तो चौराहों को पहचान ही नहीं पाएगा। आने वाले दिनों में काॅलेज रोड भी फोरलेन हो जाएगी। होटल व प्राइवेट अस्पतालों की भरमार है।
-केएम अग्रवाल, साहित्यकार
-
जिस शहर में चौड़ी सड़कें हों, वहां का विकास होना स्वभाविक है। महराजगंज में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यहां दो पार्क है, पहले बाहर आने वाले मेहमानों को घुमाने लायक जगह नहीं थी। अब तो यह शहर पिकनिक स्पॉट के रूप बदल रहा है। अच्छे होटल, मॉल और रेस्टोरेंट है।
-डॉ. शांति शरण मिश्र, मीडिया प्रभारी, सिटीजन फोरम
-
गुजरे वक्त में ठहरने के लिए एक होटल था। अब तो अच्छी सुविधाओं वाले होटल बन चुके हैं। बड़ी कंपनियों के शोरूम भी खुले हैं। सचमुच में अब शहर का स्वरूप बदल रहा है। सड़कों से लेकर अस्पताल, मॉल, रेस्टोरेट की भरमार है। धीरे धीरे सुविधाओं का विकास हो रहा है।
-डॉ. अजय कुमार मिश्रा, प्राचार्य, जवाहरलाल नेहरू पीजी काॅलेज, महराजगंज
-
दस साल पहले चौराहे से अगर कोई जुलूस निकलता था तो भीषण जाम लग जाता था, लेकिन सड़क चौड़ी होने के कारण अब समस्या दूर हो गई है। हाई टेक सिनेमा हाल, शोरूम के अलावा शहर में दोनों पार्क बेहतर बने हैं। शाम को बच्चों के साथ टहलने में अच्छा लगता है।
-राकेश गुप्ता, एमडी, आरके मोटर, महराजगंज