बाइक लूट के मामले में माफिया ने अदालत में किया है आत्मसमर्पण, जिला कारागार के क्वारंटीन बैरक में रखा गया है फिलहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सुधीर सिंह का नाम आज प्रदेश के टॉप माफिया की सूची में शामिल हैं, लेकिन कभी वह गोरखपुर और आसपास के जिलों में बाइक चोरी जैसे अपराध को अंजाम दिया करता था। ऐसे ही एक मुकदमे में अदालत में आत्मसमर्पण कर वह महराजगंज के जिला कारागार में बंद है। फिलहाल उसे जेल के क्वारंटीन बैरक में रखा गया था। उधर, गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में उसके गुर्गों का आतंक बरकरार है। वे अब भी होटल और ढाबों पर मंडराते और दहशत फैलाते देखे जा रहे हैं।
सुधीर सिंह वर्ष 2003 में श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के सुमेरगढ़ में राजपुर गांव के बनारसी सिंह की बाइक लूट कर फरार हो गया था। फिलहाल वह इसी मुकदमे में जेल में बंद है, लेकिन वर्तमान में वह गोरखपुर का बड़ा माफिया बन चुका है। वहां गीडा के आसपास के क्षेत्रों में सुधीर सिंह का सिक्का चलता है। उसके गुर्गे उद्योगपतियों से ही नहीं ढाबे और दुकानदारों से भी हर महीने वसूली करते हैं। सुधीर गैंग के बदमाशों की गाड़ियां देखते ही तय रकम उन तक पहुंचा दी जाती है।
महराजगंज जिला जेल में सुधीर सिंह के अलावा कानपुर के विधायक इरफान सोलंकी, राजन तिवारी, अंकित गुर्जर जैसे अपराधी बंद हैं। जिला कारागार में इन बंदियों के होने की वजह से जेल मैनुअल के अनुसार इन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 11 बंदी ऐसे हैं, जो प्रशासनिक आधार पर जिला जेल में आए हैं। जेल में कुल 787 बंदी हैं, इनमें नौ विदेशी शामिल हैं। जहां तक सुधीर सिंह की बात है तो गोरखपुर और आसपास के जिलों के व्यापारियों का दबी जुबान में कहना है कि उसके गुंडा टैक्स से परेशान होकर पान- मसाला के एक बड़े उद्योगपति ने अपने कारोबार को गोरखपुर से उखाड़कर कानपुर में जमा लिया। यह उसके खौफ का ही असर था कि उद्योगपति ने इसकी कहीं शिकायत भी नहीं की। अब एक बार फिर माफिया के जेल में जाने के बाद उद्योगपतियों के बीच चर्चा आम हो गई है कि लगता है, इस बार योगी सरकार उसे वास्तव में मिट्टी में मिलाकर ही रहेगी।
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यूपी के टॉप 61 माफिया की सूची में नाम
यूपी के टॉप 61 माफिया की सूची में शामिल गोरखपुर के पिपरौली ब्लॉक के पूर्व प्रमुख सुधीर सिंह की 10 करोड़ की संपत्ति एक साल पहले पुलिस ने जब्त की थी। इसके पहले भी शाहपुर के उसके आवास सहित 80 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। गोरखपुर के सदर व सहजनवां तहसील के तहसीलदार ने सुधीर सिंह के दो मकान, जमीन, गाड़ी कब्जे में लेने के साथ ही चार बैंक खाते सीज किए हैं। माफिया का नाम गोरखपुर के टॉप 10 सूची में भी शामिल है।
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हर बार पुलिस को देता रहा चकमा
पंचायत चुनाव में पत्नी अंजू सिंह का पर्चा खारिज होने के बाद माफिया सुधीर सिंह गोरखपुर में लगातार पुलिस को खुली चुनौती दे रहा था। माफिया 21 मई 2021 को अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने गीडा थाना क्षेत्र के कालेसर पहुंचा था। वहां पुलिस टीम ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन उसने हाईकोर्ट से स्टे दिखाकर पुलिसकर्मियों को लौटा दिया था। तब पुलिस ने उसकी दो फार्च्यूनर गाड़ियों को जब्त कर लिया था। सुधीर सिंह पर दिसंबर 2020 में गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद उसे छह महीने के लिए जिला बदर कर दिया गया, लेकिन वह बहन की शादी में कालेसर पहुंचा था। इसके दस दिन बाद वह एक दावत में आया था, तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
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पत्नी को चुनाव में उतारा, बाद में पर्चा हुआ था खारिज
व्यापारियों से रंगदारी वसूलने वाला माफिया सुधीर सिंह राजनीति का चोला पहने के लिए पिपरौली ब्लॉक से प्रमुख पद के लिए चुनाव मैदान में उतरा था। तब उसने व्यापारियों से चंदा वसूल था और इसके दाम पर बीडीसी सदस्यों के वोट अपने पक्ष में कर पिपरौली से ब्लॉक प्रमुख बन गया था। प्रदेश की सत्ता बदलने के बाद 2018 में वह सत्ता के साथ आना चाहता था, लेकिन इसी बीच एसपी को उसके रंगदारी मांगने की जानकारी मिली और असलहों के साथ उसे दबोच लिया गया। इसके बाद से वह फरार था। इस बीच, उसने पत्नी को चुनाव में उतारा दिया, लेकिन बाद में पर्चा खारिज हो गया।
पिता की हत्या के बाद आया अपराध जगत में
माफिया सुधीर सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह की हत्या हो गई थी। इसके बाद उसकी अदावत मल्हीपुर के माफिया प्रदीप सिंह के साथ हो गई। दोनों परिवार एक-दूसरे के दुश्मन बन बैठे। एक दूसरे के गुर्गे की हत्या के बाद अंत में 2016 में माफिया प्रदीप सिंह और सुधीर सिंह ने अंडरग्राउंड समझौता कर लिया। फिर मुकदमों से बरी होकर दोनों बाहर आ गए थे। लेकिन, 2017 में सरकार बदलने के बाद माफिया पर कार्रवाई के क्रम में दोनों पर पुलिस प्रशासन कहर बन कर टूटा और संपत्तियों को जब्त करने के साथ दोबारा जेल भेजने की कार्रवाई की।
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करीब सौ- सवा सौ बदमाशों की लंबी-चौड़ी फौज
पुलिस की जांच के मुताबिक, सुधीर के पास करीब सौ- सवा सौ नई उम्र के बदमाशों की लंबी-चौड़ी फौज है। इसी के दम पर सुधीर वसूली और गुंडई का खेल खेलता रहा है। पुलिस में उसकी पैठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोरखपुर पुलिस उसकी तलाश में थी और बड़ी आसानी से काफिले के साथ उसने महाराजगंज में आत्मसमर्पण कर दिया। भले ही यह बताया जाए कि एनबीडब्ल्यू के बारे में पुलिस को जानकारी नहीं थी, लेकिन बिना पुलिस की मदद के यह संभव नहीं है। पुलिस की लापरवाही की कलई खुलने के बाद अब एसपी महाराजगंज पूरे प्रकरण की जांच करने की बात कह रहे हैं।
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सुधीर के गुर्गे भी शराब-मुर्गे के शौकीन, मुफ्त खाते हैं ढाबों पर
-सुधीर के गुर्गे भी शराब और मुर्गे के शौकीन हैं। वे अक्सर ही होटल और ढाबों पर मंडराते देखे जाते हैं। धौंस जमाकर वे मुफ्त खाना खाते हैं और डर से कोई कुछ बोलता भी नहीं। बताया जा रहा है कि मई 2021 में सुधीर गीडा के एक गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने आया था और पुलिस को भनक लग गई कि सुधीर शराब के नशे में है और अभी खाना खा रहा है। पुलिस ने उसे शादी समारोह से ही उठाकर अवैध असलहा के साथ जेल भेजा था।
माफिया सुधीर सिंह पर 38 मुकदमे दर्ज हैं
लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक माफिया सुधीर सिंह पर 38 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, डकैती सहित कई गंभीर धाराएं भी हैं, लेकिन गोरखपुर में किसी ने भी उसके खिलाफ कभी रंगदारी मांगने की खुली शिकायत करने की हिम्मत नहीं की। उसके खिलाफ लखनऊ के विकासनगर थाने में महज एक केस रंगदारी के लिए हत्या का दर्ज है। नाम न छापने की शर्त पर व्यापारी बताते हैं कि छोटे-बड़े व्यापारी से तय रकम के हिसाब से वसूली की जाती है। इसकी एक शिकायत 2018 में मौखिक तौर पर तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ के पास पहुंची थी। तब उनके आदेश पर सुधीर सिंह के घर पर पुलिस की दबिश पड़ी थी और असलहों के साथ पकड़कर उसे जेल भेजा गया था। सलाखों के पीछे का उसका फोटो जारी कर यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि अब उसका खौफ खत्म हो गया, मगर ऐसा है नहीं।
माफिया सुधीर सिंह को क्वारंटीन बैरक में रखा गया है। जेल प्रशासन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सतर्क है। नियम के अनुसार सभी बंदियों को बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं। बंदियों की हर हलचल पर नजर रखी जाती है।
- प्रभात सिंह, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, महराजगंज