महराजगंज। जगह-जगह मां शेरावाली के पंडाल सजाए जा रहे हैं, लेकिन नियम का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कई जगह सजे पंडाल और मुख्य द्वार के बीच से बिजली पोल से तार गुजर रहे हैं। जो दुर्घटना का कारण भी बन सकते हैं।
हनुमानगढ़ी रोड स्थित शनिचरी बाजार, अमरूतियां गली में भव्य मां दुर्गा का पंडाल सजाया जा रहा है। महल की तरह सजाए जा रहे इस पंडाल के मुख्य द्वार के बीच पोल से गुजरता विद्युत तार दुर्घटना का कारण बन सकता है। सक्सेना नगर मऊपाकड़ में सड़क पर भव्य दुर्गा प्रतिमा स्थापित किए जाने की तैयारी चल रही है।
जनपद में महराजगंज चौक स्थित दुर्गा मंदिर के पास नवरात्र की सप्तमी को मां शेरावाली की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। समिति के लोग श्रमिकों के साथ पंडाल सजाने में जुटे दिखे। सक्सेना नगर स्थित संकटमोचन मंदिर के पास श्रीश्री नवदुर्गा समिति के अध्यक्ष रंजीत अग्रहरि ने बताया कि पंडाल का काम कल तक पूरा करा लिया जाएगा।
जयप्रकाश नगर गली में मां दुर्गा का पंडाल सजाया जा रहा है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा नवरात्र की पंचमी को स्थापित की जाएगी। कुछ दुर्गा पूजा समितियों ने बताया कि वह पंडाल में जनरेटर से बिजली की व्यवस्था करेंगे।
जनपद में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति के लिए तहसीलों में एसडीएम को दुर्गा पूजा समिति के लोग प्रार्थनापत्र दे रहे हैं। हनुमानगढ़ी स्थित मां दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारी रामनरायन ने कहा कि मां दुर्गा के लिए भव्य पंडाल बनाने की तैयारी चल रही है। दो दिन में पंडाल तैयार हो जाएगा। सुरक्षा मानक का ध्यान रखा जा रहा है।
जयप्रकाश नगर में समिति के पदाधिकारी हीरालाल ने बताया कि यहां वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। अनुमति के लिए एसडीएम के यहां प्रार्थना पत्र दिया गया है।
1972 में पंडाल में स्थापित हुई मां दुर्गा की प्रतिमा
श्रीश्री दुर्गा मंदिर समिति के संस्थापक अध्यक्ष सुशील कुमार के मुताबिक 1972 में रीडसाहब का धर्मशाला (वर्तमान में नगर पालिका कार्यालय) के पास मां दुर्गा के प्रतिमा स्थापित किया जाना शुरू हुआ। गोरखपुर से आए मूर्तिकार जगरनाथ ने मूर्ति बनाया था। उसी के आसपास मऊपाकड़ में, बृहस्पतिवार बाजार और अमरूतिया बाजार में मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना शुरू हुई। 24 मार्च 1979 को महराजगंज चौक स्थित दुर्गा मंदिर की स्थापना हुई। उसी साल से नवरात्र में मंदिर प्रांगण में दुर्गा प्रतिमा स्थापित की जाने लगी।