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पांच साल में 11 हजार महंगी हो गई मां दुर्गा की प्रतिमा

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सिसवां कस्बे में बनाई जा रही दुर्गा प्रतिमा। - फोटो : MAHARAJGANJ
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महंगाई : देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं कलाकार
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पांच साल में 11 हजार महंगी हो गई मां दुर्गा की प्रतिमा
मां दुर्गा की एक प्रतिमा की कीमत 18 से 80 हजार रुपये तक
एक प्रतिमा बनाने में लग जाता है तीन से चार दिन का समय
महराजगंज। दशहरा पर्व करीब है। कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मूर्तिकारों को एक प्रतिमा बनाने में तीन से चार दिन का वक्त लगता है। कलाकारों का कहना है कि अब प्रतिमा बनाने का खर्च बढ़ गया है। इस कारण इस साल करीब 11 हजार रुपये तक महंगी हो गई है मां दुर्गा की प्रतिमा। मां दुर्गा की एक प्रतिमा की कीमत 18 से 80 हजार रुपये तक है।
इन दिनों कलाकार सहयोगियों के साथ मां दुर्गा के अलावा मां सरस्वती, लक्ष्मी जी, गणेश जी, कार्तिकजी, शिव जी, पार्वती जी महिषासुर व बाघ आदि की प्रतिमाएं बनाने में जुटे हैं। सिसवा व कोठीभार में चार मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा बना रहे हैं। कोलकाता से सिसवा कस्बे में आए मूर्तिकार समीर विश्वास ने बताया कि पिता शंभू विश्वास के साथ 40 साल पहले आया था। समीर कहते हैं कि पहले और अब के वक्त में बहुत अंतर आ गया है। प्रतिमा बनाने वाली सामग्री अब बहुत महंगी हो गई है।
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समीर ने बताया कि पिता की मौत के बाद से प्रतिमा बनाने का कार्य शुरू किया। पांच वर्ष पहले प्रतिमाओं की कीमत सात हजार से 60 हजार रुपये तक होती थी। अब लागत बढ़ने के कारण प्रतिमाओं के मूल्य में बढ़ोतरी हो गई है। प्रतिमाओं के लिए जो पेंट प्रयोग किया जाता है, वह एक से दो हजार रुपये लीटर मिलता है। लॉकडाउन के समय सस्ती प्रतिमाएं बिकी थीं। उस समय सिर्फ लागत मूल्य निकल पाई थी। सभी खर्च काटने के बाद प्रति प्रतिमा दो हजार रुपये का फायदा हुआ था।
मूर्तिकार संजीत विश्वास ने बताया कि कच्चा सामान महंगा होने के कारण प्रतिमाओं का मूल्य बढ़ गया है। यह कारोबार अब मुनाफे का नहीं रह गया है। कोठीभार के दिनेश और सुजीत ने भी समस्याओं का जिक्र करते हुए कच्चा सामान महंगा होने की बात कही।
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कस्बे में छह माह रहकर करते हैं काम
कोलकाता से आए मूर्तिकार सिसवा कस्बे में छह माह रहकर विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाएं बनाते हैं। जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, दशहरा, लक्ष्मी पूजा के लिए प्रतिमाएं बनाते हैं। मूर्तिकारों के साथ राजकुमार चौधरी, विशुन दास और नंदू साहनी सहित पांच लोग सहयोग में रहते हैं।
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वर्ष 2017 में 7 हजार से लेकर 45 हजार तक
वर्ष 2018 में 10 हजार से 50 हजार तक
वर्ष 2019 में 13 हजार से 60 हजार तक
वर्ष 2020-21 में लॉक डाउन के कारण 10 हजार तक की प्रतिमाएं बिकी थीं
वर्ष 2022 में 18 हजार से लेकर 80 हजार की प्रतिमाएं बन रही हैं
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