महराजगंज। राम राज का सही अर्थ है कुशल राज व्यवस्था। यह व्यवस्था बनी रहे इसके लिए कानून का होना और उसका पालन करना जरूरी है। यही वजह है कि देश का कानून बनाने वालों ने इसमें भगवान राम की न्याय व्यवस्था को भी शामिल किया है। एकल विवाह और उत्तराधिकार अधिनियम में इसी व्यवस्था से कानून के छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।
कानून के छात्रों को पढ़ाया जा रहा कि भगवान श्रीराम के जन्म से पहले बहुविवाह पद्धति चलती थी। उनके पिता दशरथ ने तीन शादियां की थीं। इनमें से रानी कैकेयी ने राम को बनवास और अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी मांग ली थी। यही बात राजा दशरथ की मौत और परिवार के दुखों का कारण बनी। बहुविवाह के दुष्परिणामों से सबक लेते हुए श्रीराम ने एकल विवाह का निर्णय लिया और उन्होंने इस बात का खुलासा सूर्पनखा द्वारा शादी का प्रस्ताव रखने पर किया था। लक्ष्मण ने भी इसे अपनाया।
इसी एकल विवाह व्यवस्था को हिंदू धर्म और कानून में अपनाया गया है। हिंदू विवाह अधिनियम धारा-5 में विवाह की आवश्यक शर्तो में सबसे पहली शर्त हो यह रखी गई है कि दूसरा विवाह तभी किया जा सकता है, जब पहला वैवाहिक संबंध जीवित (दंपती में तलाक या किसी एक की मृत्यु हो गई हो) न हो। इसका पालन न करने पर भारतीय दंड संहिता के धारा 494 के अनुसार दोषी को दंड और जुर्माने का प्रावधान है।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के मुताबिक परिवार का मुखिया कर्ता माना जाता
राम रेखा राय गंगा राय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद अंसार आलम ने बताया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के मुताबिक परिवार का मुखिया कर्ता माना जाता है। इसके अनुसार पिता के न रहने पर जोष्ठ के क्रम में बेटे को परिवार का कर्ता माना जाता है, लेकिन मंदबुद्धि, गंभीर दोष का अपराधी या मृत्यु होने पर अन्यधा स्वेच्छा से वह अपनी इस योग्यता को खत्म कर सकता है। राजा दशरथ की मृत्यु होने और राम के वनवास चले जाने पर भरत द्वारा उनकी खड़ाऊ रखकर प्रतिनिधि के तौर पर राजपाठ चलाया गया। यह उसी तरह से है, जैसे अन्न किसी विवादित संपत्ति पर कानूनी प्रक्रिया के बाद रिसीवर बैठा देना। इसे भी रामायण के उदाहरण देकर ही कानून के छात्रों को पढ़ाया जाता है। छात्रों को समझाया जाता है कि उत्तराधिकार के नियम का पालन करने पर राम के भाइयों में एकजुटता रही। जबकि द्वापर युग में पुत्र मोह में धृतराष्ट्र द्वारा उत्तराधिकार के नियम को न मानने का दुष्परिणाम महाभारत का युद्ध है कानून के छात्रों के चीजों को और राम से जुड़े प्रसंगों को पढ़ाया जाता है। रामराज की परिकल्पना के लिए कई कानून धार्मिक मामलों के उदाहरण देकर पढ़ाए जाते हैं।